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Black Hole क्या है और इसकी संपूर्ण जानकारी

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– ब्रह्मांड का रोमांच ब्लैक होल की पहली छवि 

-2015 के बाद कॉस्मोलॉजी के क्षेत्र में हुई खोजो ने ब्रह्मांड को देखने तथा समझने के लिए बिल्कुल ही नया रास्ता बना दिया है इनमें गुरुत्वीय तरंगों की खोज ने ब्रह्मांड को देखने के लिए जहां प्रकाश और  न्यूट्रिनो के पश्चात तीसरी खिड़की उपलब्ध कराई है वही हाल ही में प्राप्त की गई black hole की छाया की छवि ने चौथी वैज्ञानिकों ने black hole की छाया की पहली छवि हाल ही में 10 अप्रैल 2019 को जारी की है इस छवि के विश्लेषण से black hole इसकी गतिविधियों और इसकी उपस्थिति से इसके आसपास के वातावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने में मदद मिली है तथा इसी नई खोज से भविष्य में ब्रह्मांड को कहीं और छुपे रहस्यों के खुलने की आशा बंधी है । Black hole kya hota hai

– Black hole वास्तव में होल नहीं black hole जैसा नाम से ध्वनित होता है वैसा है नहीं वह वास्तव में कोई छिद्र नहीं है लेकिन इसमें जो भी पदार्थ प्रवेश करता है वह उसी का होकर रह जाता है इसका गुरुत्वाकर्षण इतना अधिक होता है कि इसमें से पदार्थ तो ठीक प्रकाश तक बाहर नहीं निकल कर आ पाता है यही इसे रहस्यमई बना था है क्योंकि इसके अंदर क्या हो रहा है इसे जानना असंभव हो जाता है । Black hole kya hota hai

-पृष्ठभूमि

सापेक्षता सिद्धांत क्वांटम यांत्रिकी के जन्म के पहले न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत को प्रतिपादित किया था इसके अनुसार जब भी किसी वस्तु को पृथ्वी चंद्रमा सूर्य आदि जैसे किसी खगोलीय पिंड की सतह से ऊपर की ओर उछाला जाता है तब वह पिंड गुरुत्वाकर्षण के कारण दोबारा उसकी और लौटकर आ जाती है लेकिन वस्तु कितनी ऊपर जाएगी उसके प्रारंभिक वेग पर निर्भर करता है जितना अधिक वेग उतनी अधिक ऊंचाई तक वस्तु जाती है वेग का एक  मान ऐसा भी हो सकता है जिसे पाने पर वस्तु दोबारा लौटकर नहीं आती है इस वेग को पलायन वेग कहते हैं इस समझ के विकसित होने के बाद ब्रह्मांड में किसी ऐसे भारी पिंड के अस्तित्व के बारे में सोचा गया जहां पलायन वेग का मान प्रकाश के वेग से अधिक हो इसके बाद 1915 में आइंस्टीन ने सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत को प्रतिपादित करते हुए कहा कि हम जिस ब्रह्मांड में में रहते हैं उसकी चार विमाएं हैं इनमें तीन विमाएं लंबाई चौड़ाई ऊंचाई स्थिति को व्यक्त करने के लिए तथा चौथी विमा समय के लिए काल होती है इसे चतुविर्मीय काल कहते हैं जब भी कोई आकाशीय पिंड इसमें उपस्थित होता है उस स्थान की काल में वक्रता आ जाती है वक्रता की मात्रा पिंड के द्रव्यमान से संबंधित रहती है उदाहरण के लिए हमारे सूर्य जैसे तारे की तुलना में सूर्य से भारी अन्य किसी तारे की वक्रता अधिक होती है इस सिद्धांत का अनुप्रयोग करते हुए 1916 में कार्ल शवाटर्जचाइल्ड नामक वैज्ञानिक ने black hole को परिभाषित किया इसको केंद्र मानते हुए उन्होंने इस का नाम बताया जिससे बने गोले के अंदर से आकाश में स्थित black hole की स्थिति के बारे में कुछ भी जानना संभव नहीं है इसके बाद भारत के युवा वैज्ञानिक चंद्रशेखर ने सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत द्रव्यमान ऊर्जा समीकरण परमाणु नाभिक की संरचना पोली के अपवर्जन नियम हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत आदि को ध्यान में रखते हुए तारों की जीवन इलाका का पता लगाते हुए एक सिद्धांत विकसित किया इससे चंद्रशेखर सीमा का पता चला जो बताती है कि अपने अंत समय में तारा कौन सा रूप अख्तियार करेगा सीमा के अनुसार किसी भी तारे की अंत समय मैं उसके कोर का द्रव्यमान अगर हमारे सूर्य के द्रव्यमान से 1.44 गुना कम होगा तो यह श्वेत बोना बनेगा लेकिन इससे अधिक होने पर वह न्यूट्रॉन और बहुत अधिक होने पर black hole  बनेगा।



Black hole kya hota hai

Black hole में इतना अधिक गुरुत्वाकर्षण होता है कि इसके पास आने वाले पिंड को खींच कर अपने मे समाहित कर लेता है इस तरह यह वेक्यूम क्लीनर की तरह व्यवहार करता है वैसे बहुत भारी तारों की अवशेष का नामकरण black hole जॉन व्हीलर द्वारा बाद में सन 1964 में किया गया इसके बाद सन् 1970 में स्टीफन हॉकिंग ने black hole के आधुनिक सिद्धांत का प्रतिपादन किया हॉकिंग की नजर में black hole को विकिरित करने वाले पिंड होते हैं ना कि वेक्यूम क्लीनर की तरह सब कुछ अपने अंदर समाहित करने वाले black hole से विकिरित होने वाले इन विकिरण को वॉकिंग विकिरण के नाम से जाना जाता है black hole के बारे में सैद्धांतिक समझ विकसित होने के बाद वैज्ञानिक इस तरह के रहस्यमई पिंडों के अस्तित्व को लेकर आश्वस्त हुए उन्होंने उनकी खोज के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास आरंभ कर दिए सन 1970 में वैज्ञानिकों ने सिग्नस X1 नामक जिस खगोलीय पिंड को  खोजा उसे black hole के अस्तित्व का प्रथम अप्रत्यक्ष प्रमाण माना इसके बाद सन् 1994 में वैज्ञानिकों को हवन स्पेस टेलीस्कोप की मदद से कुछ निहारिकाओं के केंद्र में बहुत भारी black hole का पता चला लेकिन इसके अस्तित्व का प्रत्यक्ष प्रमाण इसकी छाया के प्रतिबिंब के रूप में हाल ही में मिला है । Black hole kya hota hai

-क्या होता है जब पदार्थ Black hole की तरफ आकृष्ट होता है

जब पदार्थ किसी black hole के इवेंट होराइजन की तरफ बढ़ता है तब यह तेजी से घूमते हुए चक्कर लगाने लगता है जिसमें एक डिस्क बनने लगती है इस डिस्क में पदार्थ कण आपस में टकराने लगते हैं जिससे ताप में वृद्धि होने लगती है इसके परिणाम स्वरूप डिस्क का पदार्थ आयनिकृत होते हुए प्लाज्मा अवस्था में पहुंचने लगता है डिस्क का यह त्वरित आवेशित पदार्थ विद्युत चुंबकीय विकिरण को उत्सर्जित करने लगता है इससे इवेंट होराइजन के पास घूम रहा और black hole में गिर रहा पदार्थ अत्यधिक चमकीला नजर आता है इस प्रकाश के कारण black hole की छाया बनने लगती है इसे रिकॉर्ड करने के लिए इवेंट होराइजन टेलीस्कोप प्रोजेक्ट तैयार किया गया । Black hole kya hota hai

-प्रोजेक्ट पर विचार का आरंभिक दौर black hole के प्रत्यक्ष प्रमाण प्राप्त करने की दिशा में इवेंट होराइजन टेलीस्कोप प्रोजेक्ट से जुड़े वैज्ञानिकों ने सफलता प्राप्त की है उन्होंने निहारिका m87 के केंद्र में स्थित black hole की पहली छवि प्राप्त की इस पूरे प्रोजेक्ट में 200 से अधिक वैज्ञानिक जुड़े हैं पृथ्वी से करीब 5.5 करोड़ प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित निहारिका m87 के केंद्र में black hole है जो सूर्य के द्रव्यमान की तुलना में 6.5-+0.7 अरब गुना अधिक है इस प्रोजेक्ट से जुड़े वैज्ञानिकों के दिमाग में एक बात साफ थी कि black hole की छाया बहुत ही छोटी तथा ना देखी जा सकने वाली स्थिति में होगी उन्होंने आकलन किया कि अत्यंत छोटी छाया की छवि प्राप्त करने के लिए पृथ्वी के आकार के टेलिस्कोप की जरूरत होगी लेकिन ऐसे भीमकाय एक टेलीस्कोप का निर्माण तकनीकी दृष्टि से असंभव प्रतीत हो रहा था मुश्किल यह भी थी कि कोई वैकल्पिक आईडी अभी उनके सामने नहीं आ रहा था तभी इस प्रोजेक्ट से 29 वर्षीय युवा कैटी बोमन जुड़ी। Black hole kya hota hai

 

– Black hole की छवि प्राप्त करने का नवाचारी आईडिया

बोमन ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने के दौरान एक एल्गोरिदम विकसित की थी जिससे करीब 50 लाख गीगाबाइट डाटा का इस्तेमाल कर एक छवि प्राप्त की थी वह इस प्रोजेक्ट से जुड़ी बोमन ने एक टेलीस्कोप की बजाय बहुत सारे टेलीस्कोप से बने नेटवर्क का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया उन्होंने कहा कि प्रयोग के दौरान नेटवर्क के टेलिस्कोप से छाया के अलग-अलग हिस्सों के डाटा मिल जाएंगे जिनकी सहायता से बाद में कंप्यूटर ग्राफिक्स की मदद से पूरी छवि गढ़ी जा सकती है इसे वायलिन के उदाहरण से समझा जा सकता है माना हमारे पास कुछ वायलिन है जिनमें से प्रत्येक के पास कुछ नोट या तो है नहीं या अन्य वायलिन से अलग है अब अगर किसी एक धुन को किसी एक वायलिन से बजाया जाए तो हमें कुछ समझ नहीं आएगा लेकिन अगर सभी वायलिन से इसी धुन को एक साथ बजाया जाए तो धुन समझ मे आने लगेगी क्योंकि एक साथ बजाने पर वे एक दूसरे के लिए पूरक का काम करने लगते हैं धुन का जो हिस्सा किसी एक से नहीं मिल रहा होता है वह किसी दूसरे से मिलने लगता है और अगर कोई सा नहीं भी मिल रहा हो तो इसे अनुमान लगाकर जोड़ा जा सकता है जिससे धुन पूरी हो जाती है इस तरह अलग अलग वाएलिनो को एक साथ बजा कर पूरी धुन का सृजन किया जा सकता है इसी तरह कंप्यूटर ग्राफिक्स की तकनीक से किसी भी वस्तु के विभिन्न हिस्सों से प्राप्त डेटा की मदद से पूरी छवि तैयार की जा सकती है । Black hole kya hota hai

– प्रोजेक्ट के लिए रेडियो टेलीस्कोप के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की स्थापना black hole की छवि को प्राप्त करने के लिए रेडियो टेलीस्कोप इवेंट होराइजन टेलीस्कोप नेटवर्क स्थापित किया गया इसमें 8 अलग-अलग स्थानों पर इवेंट होराइजन टेलीस्कोप नॉर्थ अमेरिका यूरोप दक्षिण अमेरिका तथा दक्षिण ध्रुव महाद्वीप में स्थापित किया गया इससे बने नेटवर्क को इस तरह बनाया गया जिससे वे  एक ही तरह व्यवहार करने लगे ऐसा होने से black hole को देखने के लिए समूची पृथ्वी स्वयं एक ऑब्जर्वेटरी की बन गई क्योंकि सभी टेलीस्कोप की वास्तविक डिशेज के समग्र प्रभाव से जो वर्चुअल डिशेस तैयार होती है उसका आकार पृथ्वी के आकार के बराबर हो जाता है प्रत्येक टेलिस्कोप को 1.3 मिली मीटर तरंग धैर्य वाली विद्युत चुंबकीय तरंगों को प्राप्त करने के लिए सेट किया गया इस तरंगधैर्य पर टेलीस्कोप 25 माइक्रो आर्क सेकंड की न्यूनतम दूरी पर स्थित बिंदुओं को विभेदित करने में सफल हो गया इस तरह इस व्यवस्था से निहारिका m2 के केंद्र में स्थित black hole की अत्यंत छोटी छाया की डाटा को प्राप्त करना संभव हो सका। Black hole kya hota hai

– चुनौतियां और भी सामने थी

नेटवर्क के सभी टेलिस्कोप के एक ही समय में डाटा को लेना जरूरी था ताकि उन्हें एक साथ कंप्यूटर में फीड किया जा सके इसके बाद कंप्यूटर ग्राफिक्स से छवि प्राप्त करने के लिए एक अलग अल्गोरिथम की भी जरूरत थी सभी टेलीस्कोप से एक ही समय में डाटा को लेना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य था इसके लिए अत्यंत एटॉमिक क्लॉक परमाणु घड़ी का इस्तेमाल किया गया जिसके मापन में 10 करोड़ साल में मात्र 1 सेकंड का अंतर आता है एक और समस्या विभिन्न महाद्वीपों में मापन के समय मौसम की अनुकूलता के बारे में जानना था ताकि सभी स्थानों पर एक साथ प्रयोग के आरंभ करने के बारे में निर्णय लिया जा सके। Black hole kya hota hai

Black hole को देखने के लिए डाटा प्राप्त करने का समय यह सबसे अच्छा होता है जब मौसम प्रत्येक उन स्थानों पर अनुकूल तथा सहयोगी हो जहां इएचटी स्थापित किया गया है शोधकर्ताओं के सामने एक और बड़ी समस्या वायुमंडल में उपस्थित जल को लेकर थी चाहे वह किसी भी रूप में हो वर्षा अथवा बर्फबारी का समय डाटा लेने में बड़ी बाधा होता है क्योंकि इएचटी से मिली मीटर तरंग धैर्य में मापन के दौरान बड़ी गड़बड़ पैदा करता है इसलिए विभिन्न महाद्वीपों के मौसम की अनुकूलता पर नजर रखते हुए निर्णय लेना बहुत चुनौतीपूर्ण कार्य था।

– प्राप्त डाटा से black hole छवि निर्माण EHT टीम ने युवा कंप्यूटर विज्ञानिक बोमन के द्वारा सुझाए गए व्यावहारिक विकल्प को ध्यान में रखते हुए प्रोजेक्ट पर कार्य आरंभ किया और डाटा मिलने लगे बोमन ने ही एल्गोरिथ्म को तैयार किया जिसने उस छवि को तैयार करने में मदद की जिसे हम black hole की छवि के रूप में रोमांच का अनुभव कर रहे हैं तथा वैज्ञानिक इसे अपने समय की सबसे बड़ी खोज मान रहे हैं स्मरणीय है कि यह छवि black hole की भी नहीं है क्योंकि यह कंप्यूटर ग्राफ़िक्स की मदद से प्राप्त डेटा का एक कलाकार के नजरिये से की गई चित्रात्मक व्याख्या है इससे अब तक में रहस्यमय लग रहे तथा ना देखे जा सकने वाले black hole की छवि को देखकर रोमांचित होने का अध्ययन करने का अवसर मिला है और black hole की छाया की पहली छवि का नामकरण उसकी विशेषता को ध्यान में रखते हुए किया गया है इस नाम को हवाईइन प्रोफेसर लेडी किमुरा ने दिया है  इसमें पो का अर्थ वह डार्क स्त्रोत के सृजन का कभी अंत नहीं होता और बेहि का अर्थ होता है कई तरीकों में से एक । Black hole kya hota hai

-पो वही को प्राप्त करने के लिए 5000 टेराबाइट डाटा को रिकॉर्ड किया गया तथा इन्हें हार्ड ड्राइव में स्टोकर सुपर कंप्यूटर के लिए भेजा गया सुपर कंप्यूटर में अंतर को सही करते हुए छवि का निर्माण किया ।

-पृथ्वी का अध्ययन इस छवि में इवेंट होराइजन दिखाई दिया जो black hole के आसपास तथा प्रकाश की सीमा होती है इसमें black hole के चारों ओर एक चमकीली डिस्क या रिंग नजर आ रही है उसके जबरदस्त गुरुत्वाकर्षण के कारण मोड़ते हुए प्रकाश के black hole के इवेंट होराइजन में प्रवेश करने पर बनती है यह प्रकाश तब पैदा होता है जब इसकी और गुरुत्वाकर्षण से आकर्षित होने वाला पदार्थ टूटते हुए प्लाज्मा अवस्था में आते हुए तेजी से त्वरित होने लगता है ध्यान से देखने पर रिंग में असम्मिति दिखाई देती है इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि पदार्थ डिस्क की चमकदार दक्षिण तरफ से पृथ्वी की ओर वलयमान हो रहा है इस निष्कर्ष का आधारभूत भौतिकी है जिसके अनुसार जो पदार्थ अत्यधिक वेग से प्रेक्षक कि और आता है यह रिलेटिविस्टिक बीमिंग के कारण चमकदार दिखाई देता है रिलेटिविस्टिक वास्तव में एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें आयनिक पदार्थों का उत्सर्जन उस वेग पर होता है जो प्रकाश के वेग के बहुत करीब होता है ऐसा होने पर प्लाज्मा कणों की द्रव्यमान और ऊर्जा पर जबरदस्त सापेक्ष प्रभाव दिखाई देने लगता है जिसका आधार आइंस्टीन के सापेक्षता का विशिष्ट सिद्धांत होता है इस वेग पर प्रेक्षक की तरह आने वाला आयनिक पदार्थ अधिक चमकता है बनिस्वत उससे दूर जाने वाले के इस प्रेक्षण के पहले वैज्ञानिकों ने black hole से मिलने वाले जेट का अध्ययन किया था black hole के मिलने वाला जेट 1 ऐसी घटना है जिसमें आयनिक पदार्थ एक बीम के रूप में black hole की घूर्णन अक्ष की दिशा में बाहर की और प्रभावित होता है अगर प्रभावित पदार्थ का वेग प्रकाश के वेग से करीब होता है तो इसे रिलेटिविस्टिक जेट कहते हैं इसमें M2 के केंद्र में स्थित black hole की अक्ष का पता चल जाता है यह अक्ष प्रेक्षक और black hole को मिलाने वाली रेखा की दिशा से करीब 17 डिग्री पर स्थित होती है वर्तमान में प्राप्त छवि के अध्ययन से पता चलता है कि पृथ्वी से देखने पर यह जेट दक्षिणावर्ती चक्रीय गति करते हुए मिलते हैं । Black hole kya hota hai

 

-क्या मिला इस खोज से 

पावेही कि खोज से हमें अपने प्रिडिक्शंस को टेस्ट करने का अवसर मिला इसके अनुसार किस तरह black hole अपने में पदार्थ को समाहित करते हैं तथा अत्यधिक शक्तिशाली जेट को उत्सर्जित करते हैं जिससे समूची निहारिका के तीव्र हलचल मच जाती है यह जेट black hole की तुलना में 10 गुना बड़ा विस्तार लेते हुए फैलने लगते हैं और कोई नहीं जानता कि यह कैसे निर्मित होते हैं । Black hole kya hota hai

-क्या मिला छवि के अध्ययन से हाल ही में प्राप्त डाटा तथा उससे तैयार किए गए कंप्यूटर ग्राफिक्स से चरम स्थितियों में आइंस्टीन के सिद्धांत के लागू होने की पुष्टि हुई है इसके चलते black hole के निकट तारों और गैस के बादलों की गति के अध्ययन से इस सिद्धांत में काम करने की पुष्टि हुई थी लेकिन अभी मिली छवि ने इवेंट होराइजन के और अधिक निकट की स्थिति के अध्ययन में मदद की है आईंस्टीन के सिद्धांत के अनुसार इवेंट होराइजन के पास गुरुत्वीय बंकन तथा बन्दीकृत  प्रकाश के कारण black hole की छवि का क्षेत्र बनाना चाहिए हाल ही में जारी इस भविष्यवाणी से मेल खाती है इस तरह वैज्ञानिकों को यह भरोसा हो गया है कि उन्होंने जो छवि प्राप्त की है वह black hole की छाया की ही है अब उन्होंने विकृत काल की भांति की सुपरहिटेड पदार्थ तथा बहुत शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र पर आधारित प्रस्तावित black hole के विभिन्न कंप्यूटर मॉडलों से इसकी तुलना करने पर विचार करना है आश्चर्यजनक रूप से इसके विभिन्न फीचर्स अभी तक हुई सैद्धांतिक विवेचन से मेल खाते हुए मिलते हैं । 

-आशा की किरण

अब वैज्ञानिक मानने लगे हैं कि अधिकतर बड़ी निहारिका के केंद्र में black hole होना चाहिए वर्तमान में प्रगत EHT निर्माण के लिए वैज्ञानिक और इंजीनियर जूटे है ताकि ब्रह्मांड में उपस्थित अन्य black hole को देखा जा सके अब इस प्रोजेक्ट में और अधिक लोकेशंस पर टेलीस्कोप जोड़े जाने की योजना है ताकि स्पष्ट छवि को प्रदर्शित किया जा सके अभी चल रहे प्रयासों से हमारी अपनी निहारिका मिल्की वे कि केंद्र में स्थित black hole सगिट्टेरियस ए तारा तारा की छवि प्राप्त करना भी शामिल है हालांकि इसे देखना अत्यंत चुनौतीपूर्ण है क्योंकि इससे मिलने वाले प्रकाश की तीव्रता में जबरदस्त घटक बढ़त होती रहती है जो इसे मापने की दृष्टि से स्थिर बना देता है लेकिन वैज्ञानिक हर चुनौतियों पर विजय पाना जानते हैं आशा है शीघ्र ही हमें कई और विस्मयकारी खोजों की खबरें मिलने लगेगी black hole और उसके आसपास का क्षेत्र प्राकृतिक कॉस्मिक प्रयोगशाला होता है क्योंकि इसके आसपास का क्षेत्र एक ऐसा स्थान होता है जहां पदार्थ का रूप धारण कर गैस लाखो डिग्री तक गर्म हो जाती है और प्लाज्मा अवस्था में परिवर्तित होते हुए प्रकाश का वेग प्राप्त करने लगता है और इस वेग पर पदार्थ सापेक्षित प्रभाव दिखाते हुए अजीबोगरीब तरह से व्यवहार करने लगता है इन परिस्थितियों में भोन्तिकी कैसे व्यवहार करती है यह गहरी जिज्ञासा का विषय है इस तरह प्राकृतिक कॉस्मिक प्रयोगशाला में घट रही घटनाओं के अध्ययन से black hole को समझना संभव होता है इससे डायनामिक्स के अंतर्गत वैज्ञानिकों को इस बात का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा कि black hole किस तरह बदलते हैं तथा इस बदलाव के दौरान अपने आसपास के वातावरण को किस तरह प्रभावित करते हैं लेकिन इस तरह के अध्ययन के लिए और अधिक बेहतर छवि ही नहीं बल्कि बदलाव की प्रक्रिया और प्रभाव के अध्ययन के लिए एक फिल्म की आवश्यकता होगी शोधकर्ता इस दिशा में कार्य कर अपनी प्रयोगिक क्षमता को बढ़ाने हेतु प्रयासरत हैं। Black hole kya hota hai

 


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