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आईएएस ऑफिसर (IAS Officer)कैसे बने ?

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आप किसी भी परीक्षा की तैयारी शुरू करने के पूर्व,  सर्वप्रथम अपनी प्रकृति को भली-भांति समझ लें कि आप किस तरह के Learner है, फिर तैयारी की रणनीति बनाये।उदाहरण के रूप में, यदि कोई व्यक्ति किसी टॉपिक को दो घण्टे में पढ़ता है, वही टॉपिक पढ़ने में आपको चार घण्टे लगते हैं, तो आप इस हिसाब से रणनीति बनायें और दो घण्टे की प्रकृति के व्यक्ति से स्वयं की तुलना न करें। आप अलग है, आप विशिष्ट है, तो आप की रणनीति भी अलग होगी कि आप किस तरह और कितने घण्टे पढे़ंगे और किस समय पढे़ंगे । मेरी सलाह है कि अपनी रणनीति में किसी भी तरह के नियम मत शामिल कि ऐसा ही करेंगे या ऐसा नहीं करेंगे, बल्कि रणनीति में लचीलेपन की पर्याप्त मात्रा के साथ कठोर दृढ़ निश्चय का समावेश होना चाहिए।


तैयारी के दौरान:-

देखिये जीवन में परिश्रम, परोपकार और प्रेम का बड़ा महत्व है, वैसे ही परीक्षा में भी वहीं ,चीजें काम आती है। परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। अब आपने स्वयं के परिश्रम से पढकर जो ज्ञान अर्जित किया, इसे लोगों में बांटना परोपकार है और तीसरी चीज है, प्रेम जो आपको अपने कार्य से करना है क्योंकि किसी भी कार्य का पुरस्कार, आपको उस कार्य पर किये गये परिश्रम और दिये गये समय पर निर्भर नहीं करता अपितु इस बात पर निर्भर करता है कि आप उस कार्य से कितना प्रेम करते हो।


सोशल मीडिया टेक्नोलॉजी का प्रयोग :
बेशक सोशल मीडिया टेक्नोलॉजी का तैयारी में उपयोग, आपको नवीनतम एवं दुर्लभ ज्ञान प्रदान कर आपकी तैयारी में चार चांद लगा सकता है परन्तु यदि आपको लगता है कि आप बेहद संयमी व्यक्तित्व के है, तभी इन साधनों का उपयोग अपनी तैयारी में करे अन्यथा आपकी मोबाइल, सोशल नेटवर्किग साइट्स से दूरी ही अधिक लाभदायक होगी। मेरा विचार है कि आप सोशल मीडिया, इंटरनेट का उपयोग करते हुये पूरा ध्यान तैयारी में नहीं लगा सकते, कोई-न-कोई व्यवधान या विचलन जरूर होता है। इस कारण से में इन सभी साधनों से तैयारी के दौरान दूर रहा। आप लोगों के विचार मेरे विचार से विपरीत हो सकते हैं। अत: इस विषय पर आप स्वविवेक का उपयोग करे।
तैयारी के दो चरण:
मेरे विचार में किसी भी परीक्षा की तैयारी दो चरणों में पूर्ण होती है –
1. प्रत्यक्ष तैयारी

2. अप्रत्यक्ष तैयारी


प्रत्यक्ष तैयारी, वो जिसमें हम किताबों को अपना समय देते हैं, पाठयक्रम को तैयार करते हैं। अप्रत्यक्ष तैयारी, वो जिसमें हम स्वयं को तैयार करते हैं, उस सेवा के प्रति स्वयं को योग्य बनाते हैं। इसमें सिविल सेवा के प्रति किये जा रहे अपने प्रयासों में ईमानदारी, समर्पण भाव, प्रेम और भविष्य में इस सेवा से मिलने वाले दायित्व के प्रति आपका वर्तमान नजरिया और नियत शामिल है। यदि आप संपूर्ण प्रत्यक्ष तैयारी के बाद भी असफल हो रहे हो, तो अप्रत्यक्ष तैयारी की ओर भी विशेष ध्यान देने क्योंकि- 
“अगर नियत अच्छी हो तो,

नसीब कभी बुरा न होता।”


 सिविल सेवा की तैयारी से जुड़ी तकनीकी बातें-
जैसा कि इस परीक्षा से जुड़े सभी लोग जानते है कि परीक्षा की सम्पूर्ण प्रक्रिया तीन चरणों में पूर्ण होती है। प्रत्येक चरण हेतु कुछ विशेष जानकारी बिन्दुवार प्रस्तुत है-
 
1. प्राथमिक परीक्षा हेतुः-
 UPSC (IAS) की प्रारंभिक परीक्षा मुख्यत:  तथ्य आधारित होती है। इसमें मुख्यत: तथ्यों पर ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता है।सामान्य अध्ययन के विषयों को पढ़कर उनके वस्तुनिष्ठ प्रश्न जरूर लगाये। आप जितने वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को हल करेंगे, आप उतनी लाभ की स्थिति में रहेंगे। देश-विदेश का करेण्ट अफेयर्स लगातार प्रतिदिन पढ़े और हो सके तो तिथीवार उनके नो़्ट्स भी बनाते जाये। तथ्यों का याद करने के रोचक तरिके ढूंढे। इन्हे याद रखने के लिए आप विभिन्न तथ्यों को एक कहानी का रुप भी दे सकते है। इस ट्रिक से आपको अधिक समय तक अधिक तथ्य याद रहेंगे।
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पाठ्यक्रम पढने हेतु किन पुस्तकों पर निर्भर होना है, यह मुलत: आपका निर्णय है। बाजार मे उपलब्ध जिस पुस्तक की भाषा आपको सरल और आसानी से समझ आ जाती है और दो विश्वसनीय तथ्यों को समांहित करीती हो, उसे आप ले सकते है। प्रारंभिक परिक्षा में सामान्य अध्ययन की तैयारी कभी पर्याप्त नही होती, अत: आपको जहाँ से जो विश्वसनीय तथ्य मिले, उसे अपने ज्ञान के खजाने में रख लें। तथ्यों को एक बार पढ़कर याद नही रखा जा सकता, अत: जब भी समय मिले,  तथ्यों को दोहरावें जरूर।
 

‘समय’ महत्वपूर्ण है, अत: यात्रा करते समय या कही आते जाते समय, उस दिन पढ़े किसी टॉपिक को छोटे से कागज में सेक्षिप्त में लिखकर रयक लें और जब भी समय मिले, दोहरा लेवे।आप पढे हुए किसी विषय को अपनी आवाज में अपने फोन के साउण्ड रेकॉर्डर से रेकॉर्ड भी कर सकते है, दिसे आप कभी भी सुनकर तथ्यों को दोहरा सके। कहने का तात्पर्य यह है कि समय का हर क्षण आपको किसी- न-किसी तरह से उपयोग करना है।


2.मुख्य परीक्षा हेतु:-
UPSC (IAS) की मुख्य परीक्षा, विषय से संबंधित आपके ज्ञान को रोचकपूर्ण तरिके से बहुत ही कम समय में शीघ्रतापूर्वक, सटीक शब्दों में प्रस्तुत करने की परीक्षा है, आपकी सफलता उपरोक्त चुनौती की सम्पन्नता पर निर्भर करती है।पाठ्यक्रम पढ़ने हेतु सीमित पठन सामग्रियों को एकत्रित कर लें और उन्हें पढने में असीमित शक्ति लगा दें। अधिक पठन सामग्रियों को जुटाने के स्थान पर, जो आपके पास उपलब्ध है, उसे बार-बार पढे़।
प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी के दौरान यदि आपने पाठ्यक्रम के सभी आयामों को छूते गहन अध्ययन किया है तो मुख्य परीक्षा की लगभग 60 % तैयारी हो ही जाती है। अत: प्रारंभिक परीक्षा के पाठ्यक्रम को गहनतापूर्वक पढे।
मुख्य परीक्षा में सफलता के मूल में मुख्य परीक्षा के सम्पूर्ण पाठ्यक्रम को पढ़ने के साथ-साथ, पढ़े हुये ज्ञान को सटीक एवं रोचकपूर्ण तरीके से प्रस्तुत करना भी छुपा है, अत: उत्तर लेखन का अभ्यास अति आवश्यक है।
 
अच्छे एवं प्रभावशाली उत्तर लेखन के अभ्यास में आप किसी अनुभवी प्रतियोगी अथवा शिक्षक की मदद ले सकते हैं। यदि को मदद न मिले तो स्वयं में ही एक जाचकर्तां विकसित करें,  जो शिक्षक के अभाव आपको बता सके कि, उत्तर में क्या और किया जा सकता है? क्या हटाया जा सकता है और क्या जोड़ा जा सकता है ?
यदि आप एक जांचकर्ता है और दिन भर में आप कई कॉपियों को जांच कर थक चुके हैं। ऐसी थकान की स्थिति में दिन की आखिरी कॉपी आपके समक्ष आती है और उस कॉपी में लिखे सरल, सटीक, रोचक उत्तरों को पढ़कर आप अपनी थकान भूलकर अच्छे अंक देने को मजबूर हो जाये। बस ऐसे उत्तर लिखने का अभ्यास करना है, आपको।
  1.  प्रश्न पत्र अवधि 3 घण्टे के मुकाबले प्रश्नों की संख्या अधिक होती है, अत: लिखने की गति इतनी हो कि नियत अवधि में प्रश्न पत्र पूरा हो जावें।
  2. आपके उत्तर की भाषा सरल होनी चाहिये एवं उत्तर में सम-सामयिक तथ्यों का भी समावेश होना चाहिये। साथ ही हर उत्तर में निष्कर्ष के रूप में आपके स्वयं के अर्थपूर्ण विचार जरूर हो। 
  3. उत्तर को रोचक बनाने हेतु आप उसमें विषय से संबंधित महान विचारकों, दार्शनिकों ,क्रांतिकारियों, नेताओं, कवियों, साहित्यकारों द्वारा कहे गये विचारों, कथनों, काव्यों, श्लोकों को भी शामिल कर सकते हैं।
  4.  उत्तर में जहाँ आवश्यक हो मानचित्र, ब्लॉक, डायग्राम, पाई चार्ट का उपयोग जरूर करें। 

3. साक्षात्कार हेतु:-
  1. प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा में आपके ज्ञान की परीक्षा के उपरांत साक्षात्कार में व्यक्तित्व परीक्षण होता है।
  2. यह चरण अन्य दो चरणों के मुकाबले सरल है क्योंकि यहां आपको प्रारंभिक व मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम के स्थान पर अपने बारे में और आस-पास घटित हो रही घटनाओं का ही अध्ययन करना होता है।
  3.  आपको स्वयं की पारिवारिक पृष्ठभूमि, गृह जिले एवं उससे संबंधित मुख्य पर्यटन स्थल, प्रसिद्ध व्यक्तित्व, समस्यायें,विशेषतायें एवं स्वयं की शैक्षणिक पृष्ठभूमि की जानकारी होना अनिवार्य है।
  4. आप प्रशासनिक सेवा में जाना चाहते हैं. तो उस पद के दायित्व, चुनौतियाँ, विशेषताओं की जानकारी होना चाहिये।
  5. साक्षात्कार में बोर्ड के समक्ष अपनी बात  को कितने प्रभावशाली ढंग से रखने का जितना महत्व है, उतना ही महत्व इस बात |का है कि आपसे न बनने वाले कठिन सवालों को आप कितने अच्छे से संभाल लेते हैं।
  6. न बनने वाले कठिन सवालों पर पूरे आत्मविश्वास के साथ ‘sorry’ कहिये अथवा मॉफी मांगिये। साक्षात्कार में कुछ सवालों के जवाब ‘sorry कहना, आपकी कमी नहीं में बल्कि आपका ‘ब्रह्मास्त्र ‘ है।
  7. साक्षात्कार में गलत जवाब देने से बचें, जो जवाब आता हो उसे पूरे आत्मविश्वास के साथ कम, सटीक एवं प्रभावशाली शब्दों में बोर्ड के समक्ष रखें।
  8. ध्यान रखें कि बोर्ड, साक्षात्कार लेते समय आप में एक प्रशासनिक अधिकारी ढूंढ रहा होता है, अत: किसी भी समय साक्षात्कार के दौरान ऐसी बातें न कहें जो एक अधिकारी को शोभा न देती हो या आपके द्वारा कही किन्हीं दो बातों में दोहराव या वे एक-दूसरे को काटने वाली नहीं होना चाहिये। 
  9. आशा है, जो भी प्रतियोगी तैयारी में जुटे हैं अर्थात् जो भविष्य के प्रशासनिक अधिकारी हैं, उन्हें इन बातों से थोड़ा ही सही पर लाभ जरूर होगा। 

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