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लोकपाल बिल notes

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भारत में लोकपाल

– भारत में भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और नागरिक हितों के संरक्षण के लिए एक लंबे समय से केंद्रीयकरण के रूप में लोकपाल की व्यवस्था की जाने की मांग की जा रही थी जो कि अब पूरी हो चुकी है बहु प्रतिक्षित लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक 2013, 17 दिसंबर 2013 को राज्यसभा और 18 दिसंबर 2013 को लोकसभा में पारित होने के बाद अब अधिनियम के रूप में अस्तित्व में आ चुका है । इसे 1 जनवरी 2014 को राष्ट्रपति की अनुमति मिली और अधिनियमित होने के उपरांत यह कानून के रूप में 16 जनवरी 2014 को देश में लागू हुआ।

लोकपाल कानून पाने के लिए कब-कब क्या-क्या प्रयास हुए तथा इसका स्वरूप क्या है

इन बिंदुओं पर चर्चा करने से पूर्व यह जान लेना उचित रहेगा कि लोकपाल कहते किसे हैं लोकपाल वह सरकारी व्यक्ति होता है जिसे किसी सरकारी व्यक्ति के खिलाफ शिकायतों की जांच पड़ताल करने का अधिकार प्राप्त होता है आधुनिक शासन की बढ़ती हुई शक्तियों से नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए अनेक युक्तियों का आविष्कार किया गया उनमें से लोकपाल भी एक है। ओम्बुड्समैन की अवधारणा का विकास सर्वप्रथम 1809 में स्वीडन में हुआ था इसका कार्य सरकारी विभागों के विरुद्ध नागरिकों की शिकायतों की छानबीन करना है यदि उसे पता चलता है कि नागरिक की शिकायत सही है तो वह उसके प्रति हुए अन्याय के निवारण का प्रयत्न करता है इसकी भूमिका एक लोक अदालत करता जैसी होती है पिछले कुछ दशकों में लोक प्रणाली का तीव्र विकास हुआ है तथा इसे विश्व के अनेक देशों द्वारा अपनाया जा चुका है भारत में लोकपाल प्रणाली को अपनाने में बहुत देर की गई जबकि इसकी मांग लंबे समय से की जा रही थी भारत में प्रशासन के विरुद्ध नागरिकों की शिकायतों की देखभाल करने के लिए लोकपाल प्रकार की संस्था के गठन का विचार पहली बार सन 1963 में कानून मंत्रालय की अनुदान संबंधी मांगों पर चर्चा के दौरान सामने आया। lokpal bill notes in hindi

परंतु सन 1966 में पहली बार केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त को नियुक्त करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया चौथी लोकसभा में सबसे पहले सन 1968 में लोकपाल विधेयक प्रस्तुत किया गया हालांकि उसके बाद 1985 को छोड़कर यह बिल लगातार लोकसभा में निरंतर गिरता रहा  जब सरकार द्वारा इसे वापस ले लिया गया 1971 1977 1985 1989 1996 1998 तथा 2001 में प्रस्तुत किया जाता रहा परंतु यह कभी भी संसद में पारित नहीं हो सका 4 अगस्त 2001 को लोकसभा में लोकपाल विधेयक संसद के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाला 9 वा संस्करण में था । lokpal bill notes in hindi

सन 2004 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन द्वारा राष्ट्रीय न्यूनतम साझा कार्यक्रम में यह वचन दिया गया कि लोकपाल विधेयक को लागू किया जाएगा द्वितीय प्रशासनिक आयोग 2005 द्वारा भी यह सुझाव दिया गया कि लोकपाल के पद को बिना किसी विलंब के स्थापित किया जाए। जनवरी 2011 में यूपीए सरकार ने प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में मंत्रियों के एक समूह का गठन किया जिसे भ्रष्टाचार से निपटने के साथ-साथ लोकपाल विधेयक के प्रस्ताव का परीक्षण पर भी अपने सुझाव देने थे । सन 1968 से 2011 तक प्रस्तावित समस्त विधेयकों में सरकार द्वारा प्रधानमंत्री को भी कानून की परिधि में लाए जाने परंतु न्यायपालिका को इस से बाहर रखने पर सहमति प्रदान की गई थी।

अंततः वर्ष 2013 की दिसंबर माह में शुभ घड़ी आई जब लोकपाल विधेयक सारी बाधाएं पार कर गया जनवरी 2014 से अधिनियम के रूप में भी लागू हुआ और लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक 2013 को 17 दिसम्बर 2013 को राज्य सभा द्वारा तथा 18 दिसंबर 2013 को लोकसभा द्वारा ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि यह विधेयक दिसंबर 2011 में लोकसभा में प्रस्तुत और पारित किया गया था परंतु राज्य सभा द्वारा इसे सेलेक्ट कमेटी को संदर्भित किया गया था तथा उसके द्वारा सुझाए गए संशोधनों के साथ इसे राज्यसभा में पारित किया है साथ ही संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार राज्य सभा में संशोधन विधेयक पारित होने के कारण लोकसभा को इसे द्वारा पारित करना पड़ा है राष्ट्रपति की संस्तुति के बाद अधिनियम के रूप में यह जनवरी 2014 से देश में लागू हुआ।

– लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013 के मुख्य प्रावधान इस प्रकार है

  • -केंद्र में लोकपाल और राज्यों के स्तर पर लोकायुक्त होंगे लोकपाल में एक अध्यक्ष और अधिकतम 8 सदस्य होंगे जिनमें से 50% न्यायिक सदस्य होंगे साथ ही लोकपाल के 50% सदस्य sc-st जनजाति अल्पसंख्यक तथा अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं में से होने चाहिए । lokpal bill notes in hindi
  • -लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्यों का चयन एक चयन समिति द्वारा किया जाएगा इस समिति में प्रधानमंत्री लोकसभा अध्यक्ष लोकसभा में विपक्ष के नेता भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा सदस्यों की संस्तुति के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा नामित प्रख्यात विधिवेत्ता सदस्य होंगे। lokpal bill notes in hindi
  • – इस विधेयक में सांसदों विधायकों भ्र्ष्टाचार के दोषी व्यक्तियों तथा 45 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को लोकपाल में न रखने का प्रावधान है ।
  • -पद मुक्ति के बाद लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नहीं हो सकीगी इन्हें कोई कूटनीति की जिम्मेदारी या संघीय क्षेत्र के प्रशासक के रूप में नियुक्ति नहीं की जा सकती तथा पद छोड़ने के 5 वर्ष तक की कोई चुनाव नहीं लड़ सकेंगे । lokpal bill notes in hindi
  • -जहां तक लोकपाल के अधिकार का प्रश्न है प्रधानमंत्री को भी लोकपाल के दायरे में लाया गया है साथ ही सभी श्रेणियों के सरकारी कर्मचारी लोकपाल के अधिकार क्षेत्र में आएंगे ।
  • -इसके अतिरिक्त विदेशी योगदान नियमन अधिनियम के तहत प्रतिवर्ष ₹10 लाख से अधिक विदेशी स्रोत से अनुदान प्राप्त करने वाले सभी संगठन लोकपाल के तहत आएंगे ।
  • -सीबीआई जांच एजेंसी को लोकपाल द्वारा भेजे गए मामलों की निगरानी तथा निर्देश देने का अधिकार है प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकारी प्राप्त समिति सीबीआई के निदेशक के चयन की सिफारिश करेगी अभियोजन निदेशक की अध्यक्षता में अभियोजन निदेशालय होगा जो पूरी तरह से निदेशक के अधीन होगा। lokpal bill notes in hindi
  • – सीबीआई के अभियोजन निदेशक की नियुक्ति केंद्रीय सतर्कता आयोग की सिफारिश पर की जाएगी ।
  • -लोकपाल द्वारा सीबीआई को सौंपा गए मामलों की जांच कर रहे अधिकारियों का तबादला लोकपाल की स्वीकृति से ही हो सकेगा इस विधेयक में भ्रष्टाचार के जरिए अर्जित संपत्ति को जप्त करने के प्रावधान शामिल किए गए हैं चाहे अभियोजन की प्रक्रिया अभी चल ही रही हो।
  • – विधेयक में प्रारंभिक पूछताछ जांच और मुकदमे के लिए स्पष्ट समय सीमा निर्धारित की गई है तथा इसके लिए विधेयक में  विशेष न्यायालय के गठन का भी प्रावधान है ।
  • -इस अधिनियम के लागू होने के 365 दिन के भीतर राज्य विधान सभा द्वारा कानून बनाकर लोकायुक्त की नियुक्ति की जानी अनिवार्य होगी ।

भ्रष्टाचार और कुशासन की समस्या से जूझ रहे इस देश के लिए लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013 एक ताजा हवा के झोंके सा है यहां यह रेखांकित करना आवश्यक है कि इस कानून को मूर्त रूप प्रदान करने के लिए समाजसेवी और गांधीवादी विचारक अन्ना हजारे ने लंबी लड़ाई लड़ी जिसमें नागरिक समाज ने भी भरपूर योगदान दिया उम्मीद की जाती है कि अपने उद्देश्यों के अनुरूप लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013 सुशासन को प्रोत्साहित करने भ्रष्टाचार से लड़ने तथा नागरिकों की वैधानिक अधिकारों को संरक्षण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस कानून के प्रभावी होने से जहां भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना साकार होगा वही शासन प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। lokpal bill notes in hindi


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