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अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस 12 जून

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-अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस 12 जून

world day against child labour

– मजबूत देश और समाज के निर्माण के लिए जरूरी है खुशहाल बचपन 

-कोहरे से ढकी सड़क पर बच्चे काम पर जा रहे हैं सुबह सुबह काम पर जा रहे हैं हमारे समय की सबसे भयानक पंक्ति है यह भयानक है इसे विवरण की तरह लिखा जाना काम पर क्यों जा रहे हैं बच्चे क्या अंतरिक्ष में गिर गई है सारी गेंदे क्या दीमको ने खा लिया है सारी रंग बिरंगी किताबों को क्या काले पहाड़ के नीचे दब गए हैं सारे खिलौने क्या किसी भूकंप में बह गई हैं सारे मदरसों की इमारतें क्या सारे मैदान सारे बगीचे और घरों के आंगन खत्म हो गए हैं एकाएक तो फिर बचा ही क्या है इस दुनिया में कितना भयानक होता अगर ऐसा होता ध्यान रखे लेकिन इससे भी ज्यादा बहुत की सारी चीजें पर दुनिया की हजारों सड़कों से गुजरते हुए बच्चे बहुत छोटे छोटे बच्चे काम पर जा रहे हैं ।

कवि वही कहता है जो समाज में दिखाई देता है और कवि राजेश जोशी की यह पंक्तियां बाल श्रम की एक स्पष्ट तस्वीर हमारे सामने प्रस्तुत करती है दुनिया के वह देश जहां भी गरीबी है आर्थिक पिछड़ापन के सभी जगह बचपन जिम्मेदारियों के बोझ तले दब जाता है बाल श्रम की समस्या दशकों से प्रचलित है बच्चों का भविष्य अंधकार में होता जा रहा है गरीब बच्चे सबसे अधिक शोषण का शिकार हो रहे हैं गरीब बच्चियों का जीवन भी अत्यधिक श्रापित है छोटे छोटे गरीब बच्चे स्कूल छोड़कर बाल श्रम हेतु मजदूर है बाल श्रम मानवाधिकार का खुला उल्लंघन है यह बच्चों के मानसिक आध्यात्मिक और सामाजिक हितों को प्रभावित करता है बच्चे आज के परिवेश में घरेलू नौकर का कार्य कर रहे हैं होटलों कारखानों सेवा केंद्रों और दुकानों में नौकर के रूप में कार्य कर रहे हैं जिससे उनका बचपन जिम्मेदारियों के बोझ तले खत्म हो जाता है । world day against child labour

-2019 की थीम चिल्ड्रन शुड नॉट वर्क इन फील्ड्स बट ऑन ड्रीम्स 

-विश्व बाल श्रम निषेध दिवस 12 जून को पूरे विश्व में मनाया जाता है इस दिन को विशेष स्तर पर मनाने की मुख्य वजह बाल श्रम के विरुद्ध लोगों में जागरूकता लाने के संयुक्त राष्ट्र के प्रयास को समर्थन देना है वैश्विक स्तर पर 2019 बाल श्रम निषेध दिवस चिल्ड्रन शुड नॉट वर्क इन फील्ड्स बट आन ड्रीम्स अर्थात बच्चों को क्षेत्र में काम नहीं करना चाहिए बल्कि उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए कार्य करना चाहिए थीम के साथ मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा बाल श्रम के उल्लंघन हेतु वैश्विक स्तर पर 12 जून 2002 में विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाने की प्रक्रिया का शुभारंभ किया गया था प्रतिवर्ष 12 जून को श्रमिकों की दुर्दशा को उजागर करने तथा बाल श्रम उन्मूलन में सहयोग करने के प्रयास के क्रम में सहयोग करने पूरे विश्व में सरकार श्रमिक संगठन सामाजिक नागरिक इस दिशा में चिंतन करते हुए एक साथ प्रयास करने की कोशिश करते हैं ।

world day against child labour

-सेहत पर असर वेल्डिंग के कार्य के कारण आंखों से कम उम्र में दिखाई देना बंद होना फैक्ट्री की धुओ में निकलते खतरनाक अवशेषों को श्वास के साथ शरीर का अंग बन बना लेना जहरीली गैस से घातक रोग फेफड़ों का कैंसर टीवी आदि के शिकार होना योन शोषण के कारण एड्स अन्य यौन रोगों के कारण सारा जीवन होम कर देना भरपेट भोजन और नींद ना मिलने से अन्य शारीरिक दुर्बलता और शिक्षा के अभाव में अपने अधिकारों का पता ना होना यह सब समस्याएं और उस बच्चे की जीवन में होती है जो यह जिंदगी जीता है और छोटी उम्र से जीवन के संग शुरू हुआ उसका यह संघर्ष तब तक जारी रहता है जब तक उसकी सांसे नहीं टूट जाती ऐसा नहीं है कि केवल लड़के ही बाल श्रमिक हैं लड़कियां भी इन कार्यों में लगी है घरों में ऐसे लड़के लड़कियां आपको मिल जाएंगे जो घरेलू कार्य करते हैं विभिन्न प्रकार के उद्योग धंधों में लड़कियां कार्यरत हैं बाकी सभी समस्याओं के साथ यौन उत्पीड़न उनकी दिनचर्या का का एक अंग बन जाता है ऐसे बाल श्रमिकों से संबंधित एक अन्य समस्या है बहुत बार इन बच्चों को तस्करी आदि कार्यों में भी लगा दिया जाता है मादक द्रव्यों की तस्करी में और अन्य ऐसे ही कार्यों में इनको संयुक्त कर इनकी विवशता का लाभ उठाया जाता है बच्चों को अन्य देशों में बेचने की घटनाएं भी होती है जहां बच्चों को मानव साधन मान खिलौना  बना दिया जाता है । world day against child labour

-क्या कहता है भारतीय संविधान

संविधान की व्यवस्था के अनुरूप भारत का संविधान मौलिक अधिकारों और राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत की विभिन्न धाराओं के माध्यम से ही कहता है

– यह खतरनाक उद्योगों में बच्चों के रोजगार पर प्रतिबंध लगाता है धारा 23 

-14 साल से कम उम्र का कोई भी बच्चा किसी फैक्ट्री या खदान में काम करने के लिए नियुक्त नहीं किया जाएगा और ना ही किसी अन्य खतरनाक नियोजन में नियुक्त किया जाएगा धारा 24

– राज्य अपनी नीतियां इस तरह निर्धारित करेंगे कि श्रमिकों पुरुषों और महिलाओं का स्वास्थ्य तथा उनकी क्षमता सुरक्षित रह सके और बच्चों की कम उम्र का शोषण ना हो तथा वे अपनी उम्र और शक्ति के प्रतिकुल और काम में आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रवेश करें धारा 39ई

– बच्चों को स्वस्थ तरीके से सुंदर और सम्मानजनक स्थिति में विकास की आवश्यक सुविधाएं दी जाएंगी और बचपन और जवानी को नैतिक और भौतिक दुरुपयोग से बचाया जायेगा धारा 39 एफ 

-संविधान लागू होने के 10 साल के भीतर 14 वर्ष तक की उम्र के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रयास करेंगे धारा 45 

-बाल श्रम एक ऐसा विषय है जिस पर संघीय और राज्य सरकार दोनों कानून बना सकती हैं दोनों स्तरों पर कई कानून बनाए गए हैं अन्य प्रयास इस संदर्भ में समय-समय पर हुए हैं उन में बाल श्रम कानून 1986 यह कानून 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी अवैध पेशे और 57 प्रक्रियाओं में जिन्हें बच्चों के जीवन और और स्वास्थ्य के लिए अहितकारी माना गया है नियोजन को निषिद्ध बनाता है इन पेशो और प्रक्रियाओं का उल्लेख कानून की अनुसूची में है इस अधिनियम के अनुसार बाल श्रम तकनीकी सलाहकार समिति नियुक्त की गई इस समिति की सिफारिश के अनुसार खतरनाक उद्योगों में बच्चों की नियुक्ति निषिद्ध है 1987 में राष्ट्रीय बाल नीति बनाई गई थी।

– फैक्ट्री कानून 1948 यह कानून 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के नियोजन को निषेध करता है 15 से 18 वर्ष तक के किशोर किसी फैक्ट्री में तभी नियुक्त किए जा सकते हैं जब उनके पास किसी अधिकृत चिकित्सक या फिटनेस प्रमाणपत्र हो इस कानून में 14 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए हर दिन 4:30 घंटे की कार्यविधि तय की गई है और रात में उनके काम करने पर प्रतिबंध लगाया गया है भारत में बाल श्रम के खिलाफ कार्यवाही में महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप 1996 में उच्चतम न्यायालय के उस फैसले से आया जिसमें संघीय और राज्य सरकारों को खतरनाक प्रक्रियाओं और पेशो में काम करने वाले बच्चों की पहचान करने उन्हें काम से हटाने और उन्हें गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया गया था न्यायालय ने यह आदेश भी दिया था कि एक बाल श्रम पुनर्वासन कल्याण कोष की स्थापना की जाएगी।


world day against child labour

जिसमें बाल श्रम कानून का उल्लंघन करने वाले नियोक्ताओं के अंशदान का उपयोग हो आईएलओ की रिपोर्ट बाल श्रम के वैश्विक अनुमान परिणाम और रुझान 2012- 16 में कहा गया है कि 5 और 17 वर्ष की उम्र के बीच 152 मिलियन बच्चों को विशेष परिस्थितियों में श्रम करने को मजबूर किया जा रहा है इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि 152 मिलियन में से 73 मिलियन बच्चे खतरनाक काम करते हैं जिसके एवज में उन्हें मजदूरी कम मिलती है बच्चों के काम करने की मूल समस्या निर्धनता और अशिक्षा है जब तक देश में भुखमरी रहेगी तब तक हम इस समस्या से निजात नहीं पाएंगे देश में हर स्तर पर काम करने की जरूरत है प्रशासनिक सामाजिक और व्यक्तिगत प्रयास के जरिए ही सुधार हो सकता है साथ ही देश में कुछ बेहतर योजनाएं बनाई जाएं और बेहतर ढंग से क्रियान्वित की जाए जिससे लोग आर्थिक स्तर पर मजबूत हो ताकि उनके बच्चों का काम ना करना पड़े देश में तय तो है कि 14 वर्ष के नीचे किसी बच्चे से कोई काम नहीं करवाया जाएगा पर उस पर अमल कम ही होता है व्यक्तिगत तौर पर हमारा कर्तव्य बनता है कि हम बच्चों से काम ना करवाएं जो जरूरतमंद बच्चे हैं उनकी अपनी क्षमता के अनुसार जीवन और शिक्षा के विकास में मदद करें साथ ही लोगों को भी जागरूक करें कि बच्चों से काम ना लिया जाए बाल श्रम रोकने के लिए सामाजिक क्रांति की जरूरत है ताकि लोग अपने फायदे के लिए देश के भावी निर्माताओं और कर्णधारों के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह न लगा सके। world day against child labour


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