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UPSC INTERVIEW कैसे करें तैयारी ?

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सिविल सेवा के साक्षात्कार की तैयारी के लिए हालांकि विशेष पाठ्यक्रम के  अध्ययन की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि  जो कुछ भी अब तक पढ़ा एवं अध्ययन किया है, उसे ही इस प्रकार व्यक्त करना  होता है कि एक व्यक्ति अपने आपको अन्य सामान्य शिक्षा वाले व्यक्ति से बौद्धिक रूप से भिन्न दर्शा सके


सिविल सेवा साक्षात्कार की तैयारी को दो चरणों में बाँटकर पूरा किया जा सकता है।
पहला चरण – ज्ञान वृद्धि करना

दूसरा चरण – ज्ञान का प्रस्तुतीकरण


दोनों ही चरणों को एक साथ प्रयोग करना चाहिए, जैसे जो कुछ भी एक दिन में शाम तक पढ़ा है उसका प्रस्तुतीकरण करने का अभ्यास उसी शाम को कर लेना चाहिए, चूंकि ज्ञान को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुती करण करने के लिए बार बार अभ्यास की आवश्यकता पड़ती है।
पहला चरण : ज्ञान वृद्धि करना-
 
साक्षात्कार की तैयारी के दौरान ज्ञान में वृद्धि करने के लिए प्रमुख रूप से निम्न क्षेत्रों का अध्ययन आवश्यक है
1. आपका बायोडाटा जोकि Detailed Application Form (DAF) में दर्शाया आ गया है तथा हॉबी
2. सदाबहार टॉपिक (Everageen Topic) को गहनता से तैयार कीजिए। सदाबहार टॉपिक वे विषय हैं, जो पाँच वर्ष पूर्व भी चर्चा में थे तथा अगले पाँच वर्ष बाद  चर्चा में रहेंगे। इनकी लिस्ट बना लीजिए, चूंकि ये ही वे टॉपिक होते हैं जिन पर साक्षात्कारकर्ता आपसे वार्तालाप करके आपके बौद्धिक गुण, सामाजिक गुण, सत्यनिष्ठा, आपकी बातों में स्पष्टता और प् तार्किकता को परखने का प्रयास करते हैं।ये ही वे कॉमन टॉपिक हैं, जिनके बारे में हर अभ्यर्थी कुछ न कुछ अवश्य जानता है इसलिए अभ्यर्थियों में अन्तर जानने के लिए सामान्यत: इन कॉमन टॉपिक्स से प्रश्न पूछे जाते हैं।
कुछ प्रमुख सदाबहार टॉपिक निम्नलिखीत है।
(A) सामाजिक क्षेत्र से जुड़े
(1) महिला सशक्तिकरण,
(ii) जनसंख्या,
(iii) शिक्षा,
(iv) स्वास्थ्य ,
(v) पिछड़े वर्गों का विकास,

(vi) आरक्षण -पिछडे वर्ग स्त्रियों के लिए.


(B) राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े
 (i) राजनीति का अपराधीकरण,
(ii) EVM से जुड़े मुद्दे
(iii) भ्रष्टाचार,
(iv) ग्राम पंचायत
(v) नक्सलवाद, उग्रवाद, आतंकवाद,

(vi ) पड़ोसी देशों के साथ सम्बन्ध


(C) आर्थिक क्षेत्र से जुड़े
(i) गरीबी
(ii) बेरोजगारी,
(iii) किसान आत्महत्या, हरित क्रान्ति,
(iv) विश्व व्यापार संगठन,
(v) वैश्वीकरण.
(vi) ऊर्जा संकट,
(vii) वस्तु एवं सेवा कर

(viii) सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS).


(D) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े –
(i) जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण प्रदूषण
(ii) सतत विकास
(iii) आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस
(iv) साइबर सुरक्षा,

(v) नदी जोड़ो परियोजना, गंगा सफाई इत्यादि


3.समसामयिकी से जुड़े मुद्दे 
4. वैकल्पिक विषय से जुड़े प्रश्न
5. पिछली नौकरी से जुड़े प्रश्न

6. स्नातक, परास्नातक या अन्य शैक्षिक पृष्ठभूमि वाले विषयों से प्रश्न


उपर्युक्त क्षेत्रों का अध्ययन करके आप अपने ज्ञान में वृद्धि कर लेते हैं, तो इसके बाद अगला महत्वपूर्ण चरण प्रारम्भ होता है कि किस प्रकार से साक्षात्कारकर्ता के सामनेआप अपने ज्ञान को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करते हैं.

दूसरा चरण : ज्ञान का प्रस्तुतीकरण


1. अपने आपको बौद्धिक रूप से अन्य के मुकाबले भिन्न दर्शाने के लिए एक ही बात को इस प्रकार व्यक्त करना होता है कि  उसमें सिद्धान्त एवं व्यवहार दोनों सम्मिलित हो जाएं किसी भी प्रश्न के उत्तर को कई प्रकार से तथा विभिन्न शब्दों एवं वाक्यों का प्रयोग करके दिया जा सकता है, परन्तु सबसे ज्यादा प्रभावी उत्तर वही हो सकता है जिसमें यदि सम्भव हो, तो सिद्धान्तों का प्रयोग भी हो।


उदाहरण के लिए UPSC सिविल सेवा के परीक्षा के एक साक्षात्कार में निम्न प्रश्न पूछा गया जो कि पहले बताए गए सदाबहार टॉपिक भ्रष्टाचार से जुड़ा था।


प्रश्न.- इस संगठन (Organisation) के अधिकारियों के भी भ्रष्टाचार में लिप्त होने के समाचार आप अख़बारों में पढ़ते होंगे, क्या आपको नहीं लगता कि यह संगठन भ्रष्ट है ?
उपर्युक्त प्रश्न का उत्तर एक सामान्य से शिक्षा वाला व्यक्ति निम्न प्रकार से दे सकता। है हालांकि निम्न उत्तर भी गलत नहीं हैं. परन्तु कम प्रभावशाली हैं।
उत्तर-1. सर/मैडम ! यह पहला मामला है कि इस संगठन (Organisation) के पूर्व प्रबन्ध निदेशक पर लोग भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप लगा रहे हैं, परन्तु इस संगठन के अधिकतर अधिकारी ईमानदार होते हैं। सिर्फ एक या दो अधिकारियों केभ्रष्ट होने पर इस संगठन को नष्ट नहीं कह सकते।

2. सर/मैडम ! यह एक सम्माननीय संगठन (Organisation)है, जिस प्रकार नदी अपने स्वयं का जल पीकर खत्म नहीं कर सकती, पेड़ अपने स्वयं के फलों को खाकर फलों को नष्ट नहीं कर सकता उसी प्रकार यह संगठन भ्रष्ट नहीं हो सकता।


इसी प्रकार से एक प्रश्न के अनेक एवं अनेक प्रकार से उत्तर दिए जा सकते हैं।इन उत्तरों में किसी को भी गलत उत्तर नहीं कहा जा सकता। साक्षात्कार  में पूछे जाने वाले प्रश्न या तो तथ्यात्मक होते हैं या राय आधारित (Opinion-based). तथ्यात्मक प्रश्नों के उत्तर को गलत या सही आसानी से बताया जा सकता है तथा उसी के अनुरूप अंक भी दिए जा सकते हैं, क्योंकि वे संख्यात्मक या सीमित तथ्यों वाले होते हैं, परन्तु राय आधारित (Opinion based) प्रश्नों के उत्तर गुणात्मक होते हैं, जिन्हें किसी एक के निर्धारित पैमाने के आधार पर मुल्यांकित नहीं किया जा सकता। राय आधारित प्रश्नों के उत्तर को प्रभावशाली बनाकर अच्छे अंक प्राप्त किए जा सकते हैं। किसी भी उत्तर को प्रभावशाली बनाने के लिए उसमें सिद्धान्त ,व्यवहार , तथ्य एवं उदाहरण इत्यादि आयामों का प्रयोग किया जा सकता है।

उपर्युक्त बातों को ध्यान में रखते हुए पिछले प्रश्न का एक प्रभावशाली उत्तर निम्न प्रकार से दिया ।जा सकता है, हालांकि अन्य प्रभावशाली उत्तर भी सम्भव हो सकते हैं-


एक प्रभावशाली उत्तर –
सर/मैडम ! यह संगठन (Organisation) एक संस्था (Institution) है तथा कोई भी संस्था भ्रष्ट नहीं हो सकती है। उससे जुडे अधिकारीगण या कर्मी भ्रष्ट हो सकते हैं और ऐसे कर्मियों को बदला जा सकता है। इस आधार पर इस संगठन को भ्रष्ट नहीं कहा जा सकता।
उपर्युक्त उत्तर में संगठन को एक संस्था बताते हुए इसमें सिद्धान्त जोडने का प्रयास किया गया है।

2. जिन प्रश्नों में किसी चीज का प्रभाव, कारण, महत्व आदि हो, तो उनमें उत्तर प्रश्न की माँग के अनुसार सभी क्षेत्रों जैसे सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, अन्तर्राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी इत्यादि आयामों (Dimensions) को ध्यान में रखकर दिया जाना चाहिए।


उदाहरण के लिए एक बार UPSC सिविल सेवा के साक्षात्कार में निम्न प्रश्न पूछा गया।
प्रश्न- भारत में गरीबी के क्या कारण हैं? 
 प्रश्न का उत्तर सामान्य शिक्षित व्यक्ति अनेक प्रकार से दे सकता है, जिनमें कुछ निम्न भी हो सकते हैं
उत्तर-. सर/मैडम ! भारत में गरीबी अशिक्षा के कारण है। शिक्षा की गुणवत्ता में कमी होने के कारण वर्तमान में इंजीनियरों को ठीक-सी नौकरी नहीं मिल पाती।
2. सर/मैडम ! भारत में गरीबी का कारण अशिक्षा, नौकरियों में कमी,भूमि का असमान आवंटन, कृषि उत्पादकता की कमी, सूखा, बीमारियों के इलाज पर ज्यादा खर्च।
परन्तु उत्तर देने का एक प्रभावशाली तरीका निम्न भी हो सकता है।
एक प्रभावशाली उत्तर
सर/मैडम भारत में गरीबी के कारण शहरी क्षेत्रों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ समान हैं, तो कुछ भिन्न हैं। जिन्हें सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक आयामों में विभक्त कर समझा जा सकता है।शहरी गरीबी का कारण सामाजिक एवं आर्थिक दोनों है ।शहरी गरीबी सामाजिक कारणों से भी है, जैसे महिलाओं को व्यावसायिक या नौकरी क्षेत्रों में समाज द्वारा प्रोत्साहित न किए जाने की वजह से महिलाएं शिक्षित होते हुए भी अकुशल या अपने घरेलू कार्य करने के लिए मजबूर हैं जिससे वे परिवार की आय में बढोत्तरी नहीं कर पातीं, इसके अतिरिक्त आर्थिक क्षेत्र में विभिन्न अधोसंरचनाओं जैसे ऊर्जा, सडक आदि की कमी एवं बाजार में विदेशी सस्ते आयातित सामान की उपलब्धता के कारण अपने देश के उद्योगों को बढ़ावा देने में परेशानी जिसके कारण रोजगारों में कमी के कारण शहरी गरीबी बढ़ रही है। दूसरी ओरग्रामीण गरीबी का कारण सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक तीनों हैं। सामाजिक कारणों में अच्छी शिक्षा की कमी, जिससे अच्छी नौकरी नहीं मिल पाती तथा लोगों को अकुशल कार्य करने पड़ते हैं जिसका वेतन बहुत ही कम होता है। गाँव में आज भी स्त्री शिक्षा पर बल नहीं दिया जाता। राजनीतिक व प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण सरकारी नीतियों, जैसे भूमि की चकबंदी, सिंचाई, कृषि बाजार आदि का प्रभावी रूप में से कार्यान्वयन न होना भी भारत में ग्रामीणगरीबी का प्रमुख कारण है। इसके अतिरिक्त कृषि क्षेत्र में तकनीकी की कमी, सूखा आदि के कारण फसल उत्पादकता में कमी, ग्रामीण क्षेत्र में गरीबी के प्रमुख कारण हैं।

यहाँ एक बात और ध्यान देने वाली है कि इस उत्तर में भारत को शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बाँटकर अपने उत्तर को और स्पष्ट बनाने का प्रयास किया है इसी प्रकार से जहाँ सम्भव हो वहाँ पर इसी प्रकार के वर्गीकरण करते हुए उत्तर देना चाहिए जैसे यदि प्रश्न पूछा जाता है कि नदी की बाढ़ के प्रभाव बताओ। तब ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी चीज के प्रभाव दो ही से होते हैं एक सकारात्मक प्रभाव और दूसरा नकारात्मक प्रभाव। अब पहले नदी की बाढ़ के सकारात्मक प्रभाव बताओ तथा उसके बाद इसके नकारात्मक प्रभाव बताओ। इसी तरह यदि किसी समस्या के समाधान के बारे में पूछा जाए, तब समाधान को दो भागों में बाँटकर यथा लघुकाल के लिए तथा दीर्घकाल के लिए उत्तर दिया जा सकता है।


3. कभी – कभी साक्षात्कारकर्ता द्वारा परिभाषाएं पूछ ली जाती हैं इन परिभाषाओं का उत्तर देते समय ध्यान रखना चाहिए कि ये आधारभूत (Basic) वाक्य से प्रारम्भ हों। तथा जितने भी सम्भव आयाम हों, उन्हें बताना चाहिए। उदाहरण के लिए यदि साक्षात्कारकर्ता द्वारा पूछा जाता है कि वैश्वीकरण, वैश्विक तापवृद्धि, क्षेत्रवाद की परिभाषा बताओ, तब इन शब्दों की परिभाषाओं को बताने के दौरान ही बता देना चाहिए कि यह प्रक्रिया प्रघटना या विचारधारा इत्यादि है।


उसके बाद परिभाषा की अन्य बातें बतानी चाहिए ने जैसे प्रश्न है वैश्वीकरण (Globalisation) की परिभाषा बताओ

उत्तर-वैश्वीकरण एक प्रक्रिया (Process) है जिसके अन्तर्गत……..(बाकी जो  परिभाषा है वह बताओ)

[नोट: जिन शब्दों के अन्त में ‘करण’ है (जैसे वैश्वीकरण, उदारीकरण इत्यादि) आता हो सामान्यतः वे शब्द किसी प्रक्रिया में (Process) को दर्शाते हैं।]


प्रश्न- क्षेत्रवाद क्या होता है ?
उत्तर – क्षेत्रवाद (Regionalism) एक विचारधारा (Ideology)है जिसके अन्तर्गत….. (बाकी जो परिभाषा है वह बताओ) [नोट-जिन शब्दों के अन्त में ‘वाद’ (जैसे क्षेत्रवाद, नक्सलवाद इत्यादि) आता हो सामान्यत: वे शब्द किसी विचारधारा (ldeology) को दर्शाते हैं।
प्रश्न – वैश्विक तापवृद्धि क्या है ?
उत्तर – वैश्विक तापवृद्धि एक वैश्विक स्तर की प्रघटना (Phenomena) है जिसके अन्तर्गत………( बाकी जो परिभाषा है  वह बताओं)
इसी प्रकार अन्य ऐसी सम्भावित परिभाषाओं जिनमें इस प्रकार के आधारभूत शब्दों की सम्भावना हो, उनके पहले महत्व पूर्ण शब्द डिक्शनरी या इंटरनेट पर ढुंढकर वे याद कर लो.

इस प्रकार के शब्दों की परिभाषाएं किसी शब्द कोष (डिक्शनरी) या इंटरनेट पर खोज कर प्राप्त की जा सकती हैं। सदाबहार टॉपिक (Evergreen Topic) की परिभाषा याद करना आवश्यक है, क्योंकि सामान्यत इन्हीं की परिभाषाएं पूछी जाती रही हैं।


4. कभी कभी ऐसे प्रश्न भी पूछ लिए जाते हैं जिनकी प्रकृति विज्ञान से जुड़ी होती है। इस प्रकार के प्रश्न प्रमुखतः विज्ञान इंजीनियरिग या मेडिकल से स्नातक करने वाले अभ्यर्थिओं से सामान्यतः पूछे जाते रहे हैं। विज्ञान से सम्बन्धित प्रश्नों के उत्तर विज्ञान की भाषा में ही देने चाहिए, तभी उत्तर प्रभावशाली बन पाएगा इसी प्रकार यदि प्रश्न भूगोल, अर्थशास्त्र आदि से जुड़ा है, तब अपने उत्तर में उस विषय के शब्दों का प्रयोग करने को प्राथमिकता देनी चाहिए उदाहरण के लिए एक बार निम्न प्रश्न सिविल सेवा साक्षात्कार में पूछा गया।


प्रश्न – सरकार द्वारा नदियों पर बाँध बनाकर अनेक पनबिजली परियोजनाएं बनाई गई हैं। आप बताइए कि बाँध के जल से बिजली कैसे बनती है ?
इस प्रश्न का उत्तर एक साधारण शिक्षित व्यक्ति अनेक प्रकार से दे सकता है, उनमें में से दो उत्तर निम्न प्रकार के हो सकते हैं
उत्तर-  1.सर/मैडम !बाँध  में इकट्ठे जल की धारा तीव्रगति से जब टर्बाइन पर पड़ती है तब टर्बाइन से जुड़े डाइनमो से बिजली पैदा होती है।
2. सर/मैडम ! बाँध  से जब पानी टर्बाइन पर पड़ता है, तब यान्त्रिक ऊर्जा इलेक्ट्रिक ऊर्जा में परिवर्तित होकर बिजली पैदा करती है.
उपर्युक्त उत्तरों में कोई भी उत्तर गलत नहीं है, परन्तु एक प्रभावशाली उत्तर में प्रारम्भ से ही विज्ञान से जुड़े शब्दों का प्रयोग होना चाहिए जैसे इस प्रश्न का प्रभावशाली उत्तर देने के तरीकों में एक निम्न प्रकार से दिया जा सकता है।

एक प्रभावशाली उत्तर- सर/मैडम !  नदी पर बने बाँध के जल में ऊर्जा स्थितिज ऊर्जा के रूप में इकट्ठी रहती है तथा जब इस जल को लम्बी-लम्बी सुरंगों के माध्यम से टर्बाइन तक पहुँचाया जाता है उस समय यह स्थितिज ऊर्जा, गतिज ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है तथा जब इस गतिज ऊर्जा के कारण टर्बाइन घूमने लगता है, तब यह गतिज ऊर्जा टर्बाइन में लगे डाइनमो से इलेक्ट्रिक ऊर्जा में परिवर्तित होकर बिजली के रूप में प्राप्त होती है।


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