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विदेशी ऋण प्रभाव और चुनौतियां 

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-विदेशी ऋण प्रभाव और चुनौतियां 

-वर्तमान में अपेक्षाकृत कम बाहरी ऋण सरकार के पिछले निर्णयों का ही परिणाम है इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि सरकारी ऋण का अधिकांश हिस्सा घरेलू ऋण के रूप में है जो विनिमय दर जोखिम से प्रभावित नहीं होता भुगतान संतुलन का तात्पर्य किसी देश द्वारा विश्व के बाकी देशों के साथ किसी निर्धारित अवधि में किए गए आर्थिक लेनदेन के संतुलन से है सामान्यता निर्धारित अवधि 1 वर्ष की होती है भुगतान संतुलन के दो घटक

– चालू खाता

यह वस्तुओं सेवाओं और हस्तांतरण के निर्यात और आयात के बीच के अंतर को दर्शाता है इसके अलावा ब्याज और लाभांश भुगतान से प्राप्त आय तथा ऋण और अनुदान के हस्तांतरण के रूप में प्राप्त भुगतान राशि के आंकलन में भी चालू खाते की महत्वपूर्ण भूमिका है यदि आयात निर्यात से प्राप्त मूल्य से अधिक हो तो विदेशी मुद्रा की मात्रा में कमी हो तो चालू खाता घाटे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है । India foreign debt full information in Hindi

-भारत का चालू खाता घाटा

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार 2018 -19 में भारत का चालू खाता घाटा 68 बिलियन अमेरिकी डॉलर था जबकि 2018 में $49 बिलियन था 5 सबसे अधिक चालू खाता घाटा वाले देशों के मामले में भारतीय अर्थव्यवस्था पांचवें स्थान पर है तथा शीर्ष 4 स्थानों पर संयुक्त राज्य अमेरिका ब्रिटेन तुर्की और कनाडा है ।

-राजस्व घाटे को नियंत्रित करने की आवश्यकता

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत को राजस्व घाटे को नियंत्रित करने तथा बैंक और कॉरपोरेट बैलेंस शीट को ठीक करने की जरूरत है इसके अलावा सार्वजनिक बैंकों की ऋण क्षमता को बढ़ाने के लिए उनके प्रशासन को मजबूत करना चाहिए अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार 2017 में जर्मनी जापान और चीन चालू खाते अधिशेष वाले देश थी और इन देशों के पास 190 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का अधिशेष मौजूद था सितंबर 2019 में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा था कि भारत के चालू खाता घाटे का औसत पिछले 5 वर्षों में जीडीपी का 1.4% रहा है जो वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद आराम से वित्त पोषित किया जा सकता है 13 सितंबर 2019 को विदेशी मुद्रा भंडार का 429 बिलियन अमेरिकी डॉलर था जो लगभग 10 महीने तक आयात राशि या 1 साल तक की परिपक्वता वाले बचत द्वारा 21 महीने के ऋण को पूरा करने के लिए पर्याप्त था भारतीय अर्थव्यवस्था विदेशी प्रत्यक्ष निवेश एफडीआई के लिए पसंदीदा देश बनी हुई है और ग्रीन फील्ड परियोजनाओं के लिए शीर्ष 10 निवेश प्राप्त करने वाले देशों में शामिल है । India foreign debt full information in Hindi

-पूंजी खाता

इसके द्वारा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पोर्टफोलियो निवेश अन्य निवेश जैसे व्यापार ऋण और जमा तथा रिजर्व खातों का आकलन किया जा सकता है जब किसी देश द्वारा दूसरे देशों में की गई पूंजी निवेश की राशि प्राप्त विदेशी पूंजी निवेश से अधिक हो तो पूँजी खाता घाटे की स्थिति में उत्पन्न होती है विकासशील अर्थव्यवस्था वाले देश को निवेश के अवसर तथा घरेलू बचत में कमी के कारण चालू खाता घाटे का सामना करना पड़ता है हालांकि इस स्थिति के लिए पूंजी खाता अधिशेष होना भी आवश्यक है यदि चालू खाता घाटे में वृद्धि होती है तो घरेलू मुद्रा के मूल्य में गिरावट आ सकती है और विदेशी निवेशक अपनी पूंजी निकालने की कोशिश कर सकते हैं परिणाम स्वरूप देश में रोजगार आर्थिक विकास और जीवन स्तर पर दीर्घकालीन प्रभाव पड़ सकता है तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के लिए चालू खाता घाटे के साथ सामंजस्य बिठाना स्वभावी हैं क्यंकि वे विकास की संभावनाओं के बाद भी बड़ी अर्थव्यवस्था से ऋण ले सकते हैं । India foreign debt full information in Hindi

-अंतरराष्ट्रीय निवेश स्थिति

आई आई पी अंतरराष्ट्रीय निवेश स्थिति अर्थात आईआईपी के अंतर्गत किसी देश को राष्ट्रीय बैलेंस शीट में दर्ज परिसंपत्तियों और देनदारीओं के उप समूह को शामिल किया जाता है यह स्थिति पत्र परिसंपत्तियों या देनदारीयों के बीच के अंतर को किसी अर्थव्यवस्था की निवल दावेदारी या निवल दायित्व के रूप में पेश करता है इसकी तुलना शेष विश्व की निवल दावेदारी या निवल दायित्वों से की जा सकती है आईएमएफ के अनुसार जापान जर्मनी चीन नार्वे और स्विट्जरलैंड नेट आईआईपी अधिशेष वाले शीर्ष 5 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है इसी प्रकार अमेरिका स्पेन यूरो क्षेत्र ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील नेट आईआईपी घाटा सहने वाले पांच प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है 2018 में भारत नेट आईआईपी घाटा सहने वाले अर्थव्यवस्था में दसवें स्थान पर था और उसका घाटा 433.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया था ।

-भारत द्वारा लिया विदेशी उधार

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार सितंबर 2019 में उभरते बाजार वाले देशों के बीच भारत का बाहरी ऋण उसकी जीडीपी का 19.7% है जबकि ऋण सेवा अनुपात वर्तमान आय ऋण भुगतान तथा ब्याज भुगतान के अनुपात के रूप में जीडीपी का 6.4% है जो सबसे कम है विश्व बैंक के वर्गीकरण के अनुसार भारत विश्व में सबसे कम बाहरी ऋण लेने वाले देशों में शामिल है भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार भारत की औपचारिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा जुलाई 2019 में लिया गया विदेशी ऋण  4.98 बिलियन अमेरिकी डॉलर जो जुलाई 2019 में लिए गए विदेशी ऋण 2.18 बिलियन अमेरिकी डॉलर की तुलना में अधिक था सरकार के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2019 के अंत में बाहरी ऋण तथा जीडीपी अनुपात 19.7% है जो तुलनात्मक रूप से मार्च 2018 के अंत में जारी अनुपात 20.1% से कम है बाहरी ऋण वाणिज्यिक ऋण की भागीदारी 38% जो सबसे अधिक थी इसके बाद अनिवासी भारतीय जमा 24% तथा अल्पकालीन व्यापार ऋण 18.9% था घरेलू कंपनियों द्वारा लिए गए ऋण राशि में से और 1.56 बिलियन अमेरिकी डॉलर बाहरी वाणिज्यिक उधार द्वारा स्वीकृत मार्ग से लिए गए थे कुछ प्रमुख ऋण लेने वाले फर्मों में अंडानी पोर्टर्स एंड स्पेशल इकोनामिक लिमिटेड जॉन लिमिटेड ओएनजीसी विदेश लार्सन एंड टुब्रो एचपीसीएल मित्तल एनर्जी रिलायंस इंडस्ट्रीज और आर ई सी लिमिटेड शामिल थे इन कंपनियों को मुख्य रूप से रुपए के खर्च ईसीबी को पुनर्जीवित करने तथापूंजीगत वस्तुओं के आयात के कारण शामिल किया गया लगभग 50.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर मसाला या भारतीय मुद्रा रुपए वाले बांड जारी कर प्राप्त किया गया था टोयोटा फाइनेंशियल सर्विसेज एकमात्र ऐसी कंपनी थी जिसमें विदेशी बाजार में मसाला या रूपया आधारित बांड जारी करके 50.86  मिलियन अमेरिकी डालर जुटाए थे । India foreign debt full information in Hindi

-बाहरी वाणिज्यिक ऋण

बाहरी वाणिज्यिक ऋण मूल रूप से किसी विदेशी इकाई या दूसरे संस्थानों से लिया गया ऋण है बड़ी संख्या में भारतीय कॉरपोरेट और सार्वजनिक उपक्रमों ने निवेश के स्त्रोतों के रूप में ईसीबी का उपयोग किया है जो उन्हें व्यापार और निवेश का विस्तार करने में मदद करते हैं भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार की नीति अपनाने के बाद ईसीबी विदेशी पूंजी निवेश प्राप्त करने का प्रमुख स्त्रोत बन कर उभरी है देश में कुल पूंजी प्रवाह में ईसीबी की भागीदारी 20 से 35% है विदेशी ऋण में वृद्धि की वर्तमान प्रवृत्ति कठिन घरेलू वित्त पोषण नियमों को दर्शाती है बाहरी वाणिज्य ऋण के अंतर्गत लेनदेन का विनियमन विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम 1999 द्वारा होता है।

– ईसीबी के नियमों में हालिया छूट जुलाई 2019 में भारत सरकार की सलाह से बाहरी वाणिज्यिक ऋणों से सबंधित अंतिम उपयोग प्रतिबंधों में छूट देने की घोषणा की थी वर्तमान में संघर्षरत कंपनियों तथा कॉरपोरेट के लिए बाहरी वाणिज्यक ऋण को अधिक व्यवहारी बनाने के लिए यह छूट दी गई ताकि सस्ते ऑफशोर अर्थात अंतरराष्ट्रीय फंड जुटाए जा सके 2018 में इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज पर वित्तीय संकट के बाद से बड़े निगमों को विशेष रूप से पूंजी तरलता की कमी का सामना करना पड़ रहा है इस निर्णय से उन्हें कुछ राहत मिल सकती है इस छूट के बाद आरबीआई योग्य कॉरपोरेट धारक को अवसरचना निर्माण क्षेत्र में पूंजीगत व्यय हेतु लिए गए घरेलू ऋण चुकाने के लिए ईसीबी के माध्यम से पूंजी जुटाने की अनुमति दे सकता है इस प्रकार के ऋणों को उधार दाताओं के साथ एक बार में ही निपटाने की व्यवस्था कहा जाता है इस स्पेशल मेंशन अकाउंट या गैर निष्पादित संपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया गया है sma-2 ऋण की सबसे महत्वपूर्ण श्रेणी है जहां मूलधन या ब्याज भुगतान 61 से 90 दिनों के बाद देय है योग्य उधार कर्ताओं को कार्यशील पूंजी जुटाने तथा सामान्य कार्पोरेट उद्देश्यों के लिए 10 वर्षों की न्यूनतम औसत परिपक्वता अवधि के साथ ईसीबी जुटाने की अनुमति होगी । India foreign debt full information in Hindi

-आरबीआई गवर्नर द्वारा स्पष्टीकरण बाहरी ऋण प्राप्त करने के लिए ईसीबी को दो अलग-अलग श्रेणी के रूप में वर्गीकृत किया गया है पहला विदेशी मुद्रा आधारित ईसीबी तथा दूसरा भारतीय मुद्रा रुपए आधारित ईसीबी पात्र उधार कर्ताओं की सूची का विस्तार किया गया है तथा इसमें एफडीआई प्राप्त करने के योग्य सभी संस्थाओं को शामिल किया गया है इसके अंतर्गत सूक्ष्म आर्थिक गतिविधियों में संलग्न पंजीकृत संस्थाएं पंजीकृत सोसायटी ट्रस्ट सरकारी समितियां और गैर सरकारी संगठन को भी शामिल किया गया है ईसीबी घरेलू कंपनियों को विनिमय दर के जोखिम को कम करने की चिंता किए बिना रुपया मुद्रा आधारित बांड या मसाला बांड के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लेने का अवसर देती है स्वचालित मार्ग के अंतर्गत 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर प्रति वित्तीय वर्ष के बराबर ईसीबी प्राप्त करने की सुविधा दी गई है हाल ही में विशिष्ट ऋण प्राप्त कर्ताओं को उनकी कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं सामान्य कार्पोरेट उद्देश्यों और रुपए के ऋणों को पुनरभुगतान के लिए बाहरी वाणिज्यक ऋण के अंतिम उपयोग पर लागू प्रतिबंधों में छूट दी गई है आधारभूत अवसरंचना क्षेत्र में 3 से 5 साल की न्यूनतम परिपक्वता अवधि वाले ईसीबी के लिए अनिवार्य बचाव संविदा को 100% से घटाकर 70% कर दिया गया है ।

-अर्थव्यवस्था का खुलापन

अर्थव्यवस्था के खुले पन को जीडीपी में वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात तथा आयात के अनुपात से मापा जाता है 1990 के दशक की पहली छमाही में अर्थव्यवस्था की खुले पन की दर 20% थी जो 2014 से 19 की अवधि में बढ़कर 44% हो गई है निर्यात ऋण भुगतान के स्थाई संतुलन के लिए महत्वपूर्ण कारक है उत्पादों के विविधीकरण ने भारत को ब्रिक्स देशों की तुलना में निर्यात उत्पाद की सूची में व्यापक बनाने तथा व्यापार घाटा सहने में सक्षम बनाया है भारत अब इलेक्ट्रॉनिक्स रसायन और दवाओं जैसे फार्मासिटिकल्स आदि वैश्विक मांग वाले उत्पादों का निर्यात कर रहा है जिसकी मांग लगातार बढ़ रही है इलेक्ट्रॉनिक सामान के स्मार्टफोन सेगमेंट में भारत चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम अपनाकर आयातक के बदले निर्यातक देश बन चुका है वाणिज्यिक वस्तुओं के निर्यात में भारत के व्यापारिक निर्यात का हिस्सा 1990 के 0.5% से बढ़कर 2018 में 1.7% हो गया है । India foreign debt full information in Hindi

-क्या विदेशी बाज़ारों से अधिक ऋण देना उचित है

भारतीय स्टेट बैंक की शोध रिपोर्ट के अनुसार भारत के सरकारी बाहरी ऋण तथा जीडीपी का अनुपात कम है ऋण भुगतान की मजबूत व्यवस्था तथा स्थिर विनिमय के कारण भारत सावरन बॉन्ड बाजार का लाभ उठा सकता है विकसित देशों से पूंजी निवेश होने से निम्न घरेलू बचत की पूर्ति हो सकती है जिससे आर्थिक और सामाजिक लाभ प्राप्त हो सकते हैं सार्वभौमिक मानदंड विदेश से लोन लेने में उपयोगी होगा रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि सरकार सावरेन बांड द्वारा 10 बिलियन लगभग 70000 करोड जा सकल बाजार ऋण का 10% अमेरिकी डॉलर जुटा सकती है यह राशि भारत की कुल वर्तमान विदेशी मुद्रा भंडार का केवल 2.3% है और वित्त वर्ष 2019 से 20 में शुद्ध विदेशी प्रत्यक्ष निवेश का 29% है अपने पहले बजट भाषण में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तर्क दिया था कि भारत के पास मार्च 2019 में देश का कुल बाहरी ऋण 104 बिलियन यूएस डॉलर है जो जीडीपी के 5% से कम है और इसलिए विदेशों से अधिक ऋण लिया जा सकता है इस तर्क के विरोध में यह कहा जा सकता है कि भारत का सावरेन ऋण तथा जीडीपी का अनुपात वर्तमान सरकार के अंतर्गत कम हो रहा है जो यह दर्शाता है कि भारत सरकार सक्रिय रूप से बाहरी ऋण की तलाश में नहीं थी हालांकि ऋण लेने पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है जैसे कि भारत की ऋण अदायगी विनियम दर में उतार-चढ़ाव आधार पर भारत को मूल ऋण लेने की तुलना में अधिक राशि चुकानी पड़ सकती है। India foreign debt full information in Hindi

वर्तमान में अपेक्षाकृत कम बाहरी ऋण सरकार के पिछले निर्णयों का परिणाम है इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि सरकारी ऋण का अधिकांश हिस्सा घरेलू ऋण होगा जो विनिमय दर जोखिम से प्रभावित नहीं होगा सैद्धांतिक रूप से यदि सरकारें अपने घरेलू पूंजी बाजार में स्थानीय मुद्रा आधारित बांड नहीं बेच सकती है तो वह डॉलर आधारित बांड जारी करती है भारत के पास ऐसी कोई समस्या नहीं है कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि सरकार अधिक विदेशी संसाधनों का उपयोग करना चाहती है तो उसके पास सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश को वर्तमान की 6% की सीमा को बढ़ाने का बेहतर विकल्प उपलब्ध है यह विदेशों से बिना किसी विनिमय दर के जोखिम वाले सरकारी प्रतिभूतियों के माध्यम से विदेशी पूंजी निवेश जुटाने में मदद कर सकता है एक बार जब विदेश में इस तरह के ऋण या निवेश प्राप्त करना मुश्किल होता है तो वित्तीय संकट के समय सावरेन डॉलर बॉन्ड के विकल्प का उपयोग किया जा सकता है अच्छे समय में भारत की डॉलर बांड की मांग बढ़ने से खरीदारी में तेजी आ सकती है बुरे समय में बेचने से भारत के डॉलर बांड का मूल्य बहुत कम हो सकता है यह ना केवल अंतरराष्ट्रीय आत्मविश्वास को नष्ट करेगा बल्कि सरकारी प्रतिभूतियों के लिए घरेलू बाजार को भी प्रभावित कर सकता है।

– निष्कर्ष

बाजार विविधता नए कौशल और प्रौद्योगिकी में निवेश तथा तुलनात्मक रूप से अधिक लाभ के लिए नए निर्यात बाजार और नए उपायों की खोज करना समय की जरूरत है अतः बाहरी क्षेत्र की ताकत घरेलू आर्थिक स्थिति से प्राप्त होती है इन क्षेत्रों पर निरंतर ध्यान देकर निवेशकों और बाजार को देश की व्यापक आर्थिक वित्तीय स्थिरता बनाए रखने की क्षमता का भरोसा दिया जाना चाहिए बाहरी ऋण का मुख्य उद्देश्य चालू खाते के घाटे को स्थाई सीमाओं के भीतर रखने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार विभाग द्वारा इसकी संभावनाओं की खोज करना है भारत बाहरी वाणिज्यिक ऋण द्वारा अपनी अर्थव्यवस्था को गति दे सकता है लेकिन उसे कुछ जोखिम का सामना भी करना पड़ सकता है उदाहरण के लिए वैश्विक मंदी व्यापार और भू राजनीतिक विवाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की अस्थिर कीमतें आदि व्यापार तथा चालू खाता शेष की व्यवहारिकता के लिए संभावित जोखिम हो सकते हैं। India foreign debt full information in Hindi


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