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यूरोप का पुनर्जागरण नोट्स सिविल सेवाओं की परीक्षा हेतु

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पुनर्जागरण का अर्थ

renaissance punarjagran notes in hindiपुनर्जागरण का अर्थ फिर से जागना परंतु उसका अर्थ किसी व्यक्ति का निंदा से जानना नहीं बल्कि संपूर्ण मानव जागृति का जागना होता है ।14 से 16 वी शताब्दी में यूरोप में एक नई चेतना जागृत हुई इस नई चेतना ने मनुष्य को मध्यकालीन अंधकार को समाप्त कर प्राचीन गौरव को पुनः स्थापित करने के लिए प्रेरित किया इस चेतना को ही पुनर्जागरण कहा गया ।इसका आरंभ इटली में हुआ तथा 16 वी सदी तक यूरोप के विभिन्न क्षेत्रों में फैल गया ।पुनर्जागरण कोई अचानक घटित घटना नहीं थी बल्कि यह एक दीर्घकालीन प्रक्रिया का परिणाम थी इस प्रकार पुनर्जागरण कोई धार्मिक या राजनीतिक आंदोलन ना होकर मानव की एक विशिष्ट चेतना थी ।पुनर्जागरण शब्द से उन सभी भौतिक परिवर्तनों का बोध होता है जो मध्य युग के अंत में दृष्टिगोचर हो रहे थे इसमें मध्यकाल  की समाप्ति तथा आधुनिक काल का प्रारंभ आदि परिवर्तन शामिल थे परिवर्तन से तात्पर्य सामंतवाद की अवनति प्राचीन साहित्य का अध्ययन राष्ट्रों राज्यों का उत्थान आधुनिक विज्ञान का प्रारंभ बारूद व कुतुबनुमा का आविष्कार नए व्यापारिक मार्ग की खोज तथा प्रारंभिक पूंजीवाद का प्रारंभ आदि। renaissance punarjagran notes in hindi

यूरोप में पुनर्जागरण के कारण (CAUSES OF RENAISSANCE IN EUROPE) –

पुनर्जागरण एक ऐसा बौद्धिक और उदर सांस्कृतिक आंदोलन था जिसमें प्राचीन यूरोप की प्रेरणा के आधार पर नए यूरोप का निर्माण हो रहा था आलोचनात्मक और रचनात्मक अवधारणाएं जन्म ले रही थी परिणाम स्वरुप मनुष्य मध्यकालीन बंधनों से मुक्त होकर स्वतंत्र चिंतन की और अग्रसर हुआ तथा मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं का विकास प्रारंभ हुआ ।जो उस युग की कला साहित्य संस्कृति दर्शन विज्ञान आदि क्षेत्रों में परिलक्षित हुआ । renaissance punarjagran notes in hindi



धर्म युद्ध –

धर्म युद्ध ईसाई धर्म के पवित्र स्थल यरुशलम को लेकर हुए मुसलमानों और ईसाइयों के मध्य हुए युद्ध को धर्म युद्ध कहा गया धर्म युद्ध में यात्राओं तथा भौगोलिक अध्ययन को प्रोत्साहन किया यूरोप के लोगों ने लंबी यात्राएं की युद्ध में भाग लेने वाले लोग नए लोगों से मिले और उनसे विचार ग्रहण किये जिससे उन्हें पूर्वी देशों की तरफ शक्ति प्रयोग पद्धति तथा वैज्ञानिक खोजों की जानकारी मिली इस प्रकार धर्म युद्ध  से नए विचारों का प्रचार कर के पुराने विचारों विश्वासों तथा संस्थाओं को क्षति पहुंचा कर महत्वपूर्ण कार्य किया इस कारण पुनर्जागरण संभव हो सका। renaissance punarjagran notes in hindi

 सामंतवाद का पतन –

सामंतवाद का पतन धर्म युद्ध के परिणाम स्वरूप नए विचारों के आदान-प्रदान से जो जागृति आई उसने मध्यकालीन सामंती व्यवस्था पर गहरी चोट की इस के पतन का मार्ग प्रशस्त कर दिया । 

व्यापार वाणिज्य का विकास –

 पुनर्जागरण का एक प्रमुख कारण यह था व्यापार का उदय यूरोपीय व्यापारी यरुशलम तथा एशिया के तटो में आकर बसे जिससे व्यापार में वृद्धि हुई व्यापारिक आवश्यकताओं के चलते उनके पूर्वी देशों के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित हुए जिससे भी उनके विचारों और प्रगतिशील तत्वों से परिचित हुए। व्यापारिक संबंधों के परिणाम स्वरुप अनेक अंतरराष्ट्रीय शहरों का जन्म हुआ जैसे फ्लोरेंस वेनिस मिलान आदि।

कुस्तुनतुनिया का पतन –

कुस्तुनतुनिया का पतन 1453 में तुर्को ने कुस्तुनतुनिया पर अधिकार कर लिया जिसके कारण वहां के बहुत सारे विद्वान कलाकार दार्शनिक वैज्ञानिक विचारक और लेखक इटली जर्मनी और फ्रांस से अपने साथ यहां का ज्ञान विज्ञान तथा चिंतन  भी साथ ले आए कुस्तुनतुनिया यूरोप तथा पूर्वी देशों को जोड़ने वाली एक कड़ी थी इस पर तुर्कों का अधिकार हो जाने से यूरोपीय व्यापारियों का मार्ग अवरुद्ध हो गया उसका परिणाम स्वरूप व्यापारिक मार्गों की खोज अनिवार्य हुई और इन सभी खोजों ने पुनर्जागरण की चेतना को निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।   renaissance punarjagran notes in hindi

भौगोलिक खोजें –

भौगोलिक खोजें पुर्तगाल और स्पेन के अनेक साहसी नाविकों  ने जलमार्गों की खोज की । 1492 में कोलंबस ने अमेरिका के तट की खोज की। 1498 में वास्कोडिगामा केप ऑफ गुड होप  होते हुए भारत के कालीकट पहुंचा इन खोजों ने विश्व के विभिन्न देशों में वैचारिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया इससे मानव की चिंतन शक्ति का विकास हुआ उसकी क्षमता तथा आत्मविश्वास में वृद्धि हुई ।  renaissance punarjagran notes in hindi

कागज और मुद्रा प्रणाली –

कागज और मुद्रा प्रणाली का आविष्कार अरबों की सहायता से यूरोप वासियों ने कागज बनाने की कला सीखी जिसका सबसे पहले अविष्कार चीन में हुआ था। जर्मनी के जॉन गुटेनबर्ग ने सर्वप्रथम प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार किया इसके बाद संपूर्ण यूरोप में इसका प्रयोग होने लगा कागज और वितरण प्रणाली के आविष्कार ने ज्ञान पर विशिष्ट व्यक्तियों के एकाधिकार को समाप्त किया। पुस्तकों में ऐसा लिखा है कहकर अब जनता को गुमराह नहीं किया जा सकता क्योंकि अब पुस्तकें सर्व सुलभ थी तथा जनता की सुविधा अनुसार प्रत्येक भाषा में उनका मुद्रण प्रारंभ हो चुका था ।इस प्रकार अब सत्य सत्ता की पुत्री नही काल की पुत्री हो गई थी।   renaissance punarjagran notes in hindi

मंगोल साम्राज्य का उदय –

मंगोल साम्राज्य का उदय मंगोल साम्राज्य के उदय से पुनर्जागरण की प्रेरणा मिली 13 वी सदी में कुबलई खान ने मध्य एशिया में एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की जिसमे रोम,पोलैंड, हंगरी आदि थे उसका दरबार पूर्व और पश्चिम के धर्म प्रचार को और व्यापारियों का केंद्र था ।   renaissance punarjagran notes in hindi

शिक्षा व साहित्य –

शिक्षा व साहित्य का विकास यूरोप में अनेक विश्वविद्यालय की स्थापना हुई स्पेन के कार्डोवा विश्वविद्यालय में यूरोप में नए विचारों का प्रयास किया ।इन विश्वविद्यालयों में प्रमुख साहित्यकारो जैसे दांते,पेट्रोक, तथा मूर ने प्राचीन ग्रंथों का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद कर प्राचीन गौरव को पुनः स्थापित करने का प्रयास किया ।

इटली से ही पुनर्जागरण का सूत्रपात क्यों – 

यूरोपीय कला के साहित्य का ऐसे देश में पुनर्जन्म होना स्वाभाविक था जहां प्राचीन महत्वपूर्ण उपलब्धियां महान किंतु धुंधले रूप में नजर आ रही थी और जहां ज्ञान अर्जन की परंपरा पूर्ण रूपेण अवरोध नहीं हुई थी ।इटली में पुनर्जागरण के निम्न कारण थे –    renaissance punarjagran notes in hindi

उदारवादी समाज विचार – यूरोप में अन्य देशों की तुलना में इटली में सामाजिक वर्गों का उदय भिन्न रूप से हुआ यहां के नागरिक तथा योद्धा वर्ग जिसने राजनीतिक सैनिक तथा  सांस्कृतिक वर्ग  नेतृत्व पर एकाधिकार कर रखा था के बीच सामंती जीवन देखने को नहीं मिला ।अतः प्रभावशाली भू स्वामियों को अपदस्थ कर के समीप के नगरों में जाने के लिए विवश किया गया उत्तरी इटली में स्वतंत्र नगर राज्यों का उदय हो चुका था और वहां सामंती व्यवस्था भी दृढ़ नहीं थी अतः उदारवादी और स्वतंत्र विचारों का माहौल तैयार हुआ ।   renaissance punarjagran notes in hindi




व्यापारिक समृद्धि –  इटली एक समृद्ध देश था इसके समृद्धि का कारण विदेशी व्यापार था इटली की समृद्धि से व्यापारिक मध्यम वर्ग का उदय हुआ इसमें पोप तथा सामंतों की परवाह करना छोड़ दिया । समृद्ध व्यापारी वर्ग में साहित्यकारों तथा कलाकारों को आश्रय दिया इसमें दांते ,पैट्रोक ,एंजिलो,लियोनार्दो आदि थे। उन्होंने पुनर्जागरण का प्रसार किया व्यापारिक गतिविधियों के कारण वेनिस, मिलान, फ्लोरेंस ,नेपल जैसे नगर की स्थापना हुई ।इन नगरों में संग्रहालय सार्वजनिक पुस्तकालय शालाओं की स्थापना हुई जो अन्यत्र संभव नहीं थी ।   renaissance punarjagran notes in hindi

भौगोलिक वातावरण – इटली की भौगोलिक स्थिति अनुकूल थी साथ ही है भूमध्य सागर से मध्य में स्थित था अतः व्यापार का प्रमुख केंद्र बना व्यापारिक केंद्र होने से भौतिक सम्पनता आई जिसने संस्कृतिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया रोमन सभ्यता की जन्मस्थली इटली प्राचीन रोमन सभ्यता का जन्म स्थल रहा था यहां पर प्राचीन गौरवपूर्ण साम्राज्य के अवशेष चिह्न थे जो जनमानस पर गहरा प्रभाव डालते थे यह कारण है कि प्राचीन रोमन संस्कृति पुनर्जागरण का प्रेरणा स्त्रोत थी ।   renaissance punarjagran notes in hindi

पोप का आवास – रोम जहां पोप निवास करता था अब भी संपूर्ण पश्चिमी यूरोपीय ईसाई जंगल का केंद्र बना हुआ था। पॉप पुनर्जागरण की भावना से प्रभावित होकर अनेक विद्वानों तथा कलाकारों को रोम लाये तथा उनसे यूनानी पांडुलिपिओं का लेटिन में अनुवाद करवाया ।

लौकिक शिक्षा पर बल – मध्ययुगीन यूरोप में शिक्षा धर्म से प्रभावित तथा धर्म केंद्रित  थी किंतु इटली में व्यापार के विकास के साथ ही एक नए प्रकार की शिक्षा की अवधारणा हुई जिसमें व्यवसायिक ज्ञान तथा भौगोलिक ज्ञान को समुचित स्थान मिला। परिणामस्वरूप शिक्षा से धर्म की स्थिति गौण हुई । 

कुस्तुनतुनिया पतन – का प्रभाव कुस्तुनतुनिया पर तुर्कों का अधिपति हो जाने से अनेक विद्वान अपनी पुरातन सामग्री के साथ वहां से पलायन कर गए तथा इटली के अनेक नगरों में बसे। यह अपने साथ प्राचीन यूनानी साहित्य की अनेक पांडुलिपिया लाए जिसमें निहित ज्ञान का उस समय यूरोप का कोई परिचय नहीं था यही वर्ग चेतना का आगामी बना ।   renaissance punarjagran notes in hindi

पुनर्जागरण का स्वरूप तत्व विशेषताएं –

मानवतावाद – पुनर्जागरण की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता मानवतावाद थी जिसका अर्थ है मानव जीवन में रुची लेना मानव की समस्याओं का अध्ययन करना मानव का आदर करना तथा उसके जीवन को सुधारने और उन्नत बनाने का प्रयास करना। पुनर्जागरण कालीन चिंतको ने परलोक होने  चिंतन की बजाय इहलोक चिंतन पर बल दिया। साहित्यिक रचनाओं में भी मानव समस्याओं को प्रमुखता दी गई इस प्रकार मानवतावाद पुनर्जागरण की आत्मा रही है ।

व्यक्तिवाद – इस काल में एक एक व्यक्ति के महत्व उसकी समस्याओं तथा विशेषताओं को समझा गया इस प्रकार पुनर्जागरण चेतना ने व्यक्ति को उसके महत्व से परिचित करवाया । 



धर्मनिरपेक्षता – यह  पुनर्जागरण का महत्वपूर्ण तत्व रहा है जिसका अर्थ है धार्मिक आडंबारो तथा अंधविश्वास को दूर करना तथा व्यक्ति के जीवन को धार्मिक नियंत्रण से मुक्त करना। पुनर्जागरण काल में मानव के जीवन पर से धर्म का नियंत्रण कमजोर होना शुरू हुआ।   renaissance punarjagran notes in hindi

साहित्यिक मनोभाव जिज्ञासा तथा खोज की दृष्टि – मानवतावाद तथा व्यक्तिवाद पर बल देने के कारण व्यक्ति की जिज्ञासा तथा उसकी दृष्टि को प्रोत्साहन मिला व्यक्ति की सफलता के लिए ईश्वर को उत्तरदाई ना मानकर उसकी उपलब्धियों को माना गया ।   renaissance punarjagran notes in hindi

सहज सोंदर्य की उपासना- पुनर्जागरण की एक महत्वपूर्ण विशेषता सहज सौंदर्य की उपासना है।

मध्य वर्गीय चेतना- धनी मध्यम वर्ग के समाज में अपना प्रभुत्व स्थापित करने के लिए पॉप तथा चर्च के समान कला तथा साहित्य को संरक्षण दिया ।

बहुमुखी प्रतिभा का विकास – पुनर्जागरण काल में अनेक बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति हुए जिनमें लियोनार्डो दा विंसी एक था वह एक चित्रकार होने के साथ-साथ मूर्तिकार गणितज्ञ स्थापत्य का दार्शनिक वनस्पति विज्ञान का ज्ञाता मानव शरीर का विशेषज्ञ भी था।इस तरह माइकल एंजेलो एक चित्रकार मूर्तिकार तथा इंजीनियर था ।

बौद्धिकता पर बल – पुनर्जागरण काल में आस्था के स्थान पर बौद्धिकता पर बल दिया गया अर्थात मानो तब जानो की जगह जानो तब मानो पर बल दिया गया।   renaissance punarjagran notes in hindi

पुनर्जागरण का प्रभाव –

साहित्य के क्षेत्र में प्रभाव – मध्य काल में साहित्य केवल धार्मिक विषय पर ही लिखे जाते थे किंतु पुनरजागरण काल में साहित्य पर धर्म का नियंत्रण नहीं रहा अतः साहित्य धर्म की चार दीवारों से निकलकर जनसाधारण तक पहुंचा मध्यकाल में केवल पद्य में रचनाएं होती थी जबकि पुनर्जागरण काल में गद्द शैली का विकास हुआ नाट्य विद्या का आरम्भ भी इसी युग में हुआ लेटिंन के साथ-साथ इटालियन जर्मनी ,फ्रांस ,स्पेनिश,स्वीडिश भाषा में साहित्य का सृजन हुआ पुनर्जागरण काल में यूरोप के लगभग सभी देशों में मानवतावादी विचारों से ओतप्रोत रचनाएं हुई जिन्होंने विभिन्न भाषाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त किया। उदाहरण सर्वप्रथम दांते ने डिवाइन डिवाइन कॉमेडी नामक महाकाव्य की रचना की जिसमें मानव प्रेम देश प्रेम और प्रकृति प्रेम का वर्णन किया ।

कला के क्षेत्र में प्रभाव – मध्य काल में कला धर्म के हाथों की कठपुतली थी पुनर्जागरण ने कला को धर्म से मुक्त कराया इस युग में कला में मौलिकता सौन्दर्यता  तथा सनजीवता का समावेश हुआ कला की अभूतपूर्व उन्नति के कारण विद्वान इस युग को यूरोपीय कला का स्वर्ण युग कहने लगे । 



चित्रकला – इस युग में चित्रकला का विकास हुआ मध्य युग में चित्रकारों के लिए रंग निश्चित थे तथा इन नियमों को तोड़ ना दंडनीय अपराध था किंतु पुनर्जागरण काल में कलाकारों ने मानवतावादी विचारों से ओतप्रोत होकर रचनाएं की तथा इनमें प्रेम वात्सल्य तथा प्रकृति का चित्रण किया उन्होंने अपनी रचनाओं में स्वतंत्रता पूर्वक रंगों का प्रयोग किया ।   renaissance punarjagran notes in hindi

स्थापत्य कला – मध्य युग में स्थापत्य की गोथिक कला प्रचलित थी जिसमें नुकीली मोहराओं का प्रयोग किया जाता था ।परंतु पुनर्जागरण प्रेरणा से प्रभावित होकर कलाकारों ने प्राचीन रोमन तथा यूनानी शैलियों को नए तरीके से अपनाया ।अब स्थापत्य में श्रृंगार, सज्जा, अलंकरण ,महाराव तथा स्तम्भो की प्रधानता होने लगी रोम में स्थित सेंट पीटर का गिरजाघर इसका सुंदर उदाहरण है ।

मूर्तिकला – पुनर्जागरण काल में मूर्तिकला का तीव्र विकास हुआ इस काल के प्रमुख मूर्तिकार माइकल एंजेलो तथा मायकल एंजेलो आदि थे माइकल एंजेलो की डेविड तथा पियथा  मूर्तिकला का सुंदर उदाहरण है ।

संगीत कला –इस काल में वाद्य संगीत बहुत अधिक लोकप्रिय हुआ आधुनिक ओपेरा का जन्म इसी युग में हुआ रिबिक नामक वाद्य का स्थान वायलिन ने लिया ।

विज्ञान के क्षेत्र में प्रभाव – पुनर्जागरण की अवधारणा ने विज्ञान के विकास को भी प्रेरित किया यद्यपि वैज्ञानिक खोजें 17 से 18 वीं शताब्दी में हुई लेकिन इनका बीजा रोपण पुनर्जागरण काल में ही हो चुका था इस युग के लोग आधुनिक विचारों के संपर्क में आए जिस में ज्ञान का विकास हुआ रोजर बेकन ने प्रयोगात्मक विज्ञान को जन्म दिया ।कोपरनिकस ने सूर्य सिद्धांत दिया उसी तरह न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत था गैलीलियो ने टेलिस्कोप का आविष्कार किया नीदरलैंड के वे सीरिलियन ने शल्य चिकित्सा का गहन अध्ययन किया तथा जर्मनी में जॉन गुटेनबर्ग ने प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार किया ।   renaissance punarjagran notes in hindi

भौगोलिक खोजें – पुनर्जागरण चेतना द्वारा चलाई गई जिज्ञासा और साहस की भावना  ने देशों का पता लगाने तथा समुद्री मार्गों को खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई 1487 में बारथोलोमियो डिजाज अफ्रीका के दक्षिणी तट पर पहुंच तथा केप ऑफ गुड होप का नाम दिया ।1498 में वास्कोडिगामा भारत पहुंचा 1492 में कोलंबस ने अमेरिका की खोज की इन खोजो ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा दिया तथा उपनिवेशवाद का आधार तैयार किया । 

सामाजिक जीवन पर प्रभाव – अब समाज में व्यक्तिगत सामर्थ्य व योग्यता पर बल दिया जाने लगा जिससे लोगों का दृष्टिकोण वैज्ञानिक तथा विश्लेषणात्मक हुआ लोक परलोक की बजाय इहलोक पर बल देने लगे ।जिससे नागरिक जीवन का महत्व बढ़ा सामाजिक संस्थाओं तथा मूल्य में परिवर्तन होने लगा ।

धार्मिक जीवन पर प्रभाव – पुनर्जागरण का मानव प्रत्येक चीज को तर्क की कसौटी पर कसता था ।अंधविश्वासों ,रूढ़ियों आस्था तथा धर्म की आलोचनात्मक व्याख्या होने लगी। तथा जीवन पर धर्म की पकड़ ढीली होने लगी ।

राजनीतिक जीवन पर प्रभाव –पुनर्जागरण के परिणाम स्वरुप यूरोप में सामंतवाद का पतन हुआ तथा शक्तिशाली राष्ट्रों का पतन हुआ था शक्तिशाली राष्ट्र का निर्माण हुआ ।राजनीतिक कार्यों में पॉप का हस्तक्षेप अनुचित बताया गया पुनर्जागरण के कारण यूरोप के निवासियों में राष्ट्रीयता की भावना का विकास हुआ।   renaissance punarjagran notes in hindi


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