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रूस की क्रांति 1917 Russian Revolution notes

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1917 की रूसी क्रांति बीसवीं शताब्दी के विश्व इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना रही है 1789 की फ्रांस की क्रांति में जहां स्वतंत्रता समानता और बंधुत्व की भावना का प्रचार कर यूरोपीय जीवन को प्रभावित किया वहां रूसी क्रांति ने ना केवल रूस और यूरोप को बल्कि पूरे विश्व पर गहरा प्रभाव डाला इस क्रांति में ना केवल निरंकुश  एकतंत्री,स्वेच्छाचारी,जार शाही शासन का अंत किया बल्कि कुलीन जमींदारों सामंती पूंजीपतियों आदि की आर्थिक और सामाजिक सत्ता को समाप्त करते हुए विश्व में पहली बार मजदूरों और किसानों की सत्ता स्थापित की मार्क्स के वैज्ञानिक समाजवाद को मूर्त रूप रूसी क्रांति ने ही दिया। इस क्रांति ने समाजवादी व्यवस्था को स्थापित किया यह विचारधारा 1977 के बाद शक्तिशाली हो गई 1950 तक लगभग आधा विश्व इसके अंतर्गत पा चुका था। russia ki kranti notes in hindi

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1905 में जापान द्वारा रूस पर आक्रमण रूसी की हार जनता द्वारा शासन वर्ग का विरोध जन असंतोष तथा मजदूर वर्ग का विरोध जन असंतोष तथा मजदूर वर्ग की दयनीय स्थिति में क्रांति को आवश्यक बना दिया ।

देश को क्रांति की ज्वाला में गिरने से बचाने के लिए स्वायत्त संस्थाओं के उदारवादी नेताओं ने शासन के समक्ष कुछ मांगे रखी जिनको जार ने ना मानकर प्रशासकीय सुधार को आवश्यक दिया। ऐसे समय में हड़ताल मजदूरों ने अपनी मांगों के समर्थन में रूस के शासक जार को एक ज्ञापन सौंपा। जार ने निहथे व अनुशासन लोगों पर गोलियों की बौछार करा दी जिसे खूनी रविवार 22 जनवरी 1950 के नाम से जाना जाता है ।यहां से क्रांति का आगाज हुआ मजदूरों के साथ कृषकों रेलवे कर्मचारियों ने भी विद्रोह कर दिया जनता के आक्रोश की बाढ़ को जार सहन नहीं कर पाया और मजबूर होकर उसने जनता को मूल अधिकार व स्वतंत्रता लेने का निर्णय लिया तथा मताधिकार के आधार पर निर्वाचित विधायक शक्ति प्राप्त संसद ड्यूमा स्थापित करने का वचन दिया जो कि इस क्रांति का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम था। russia ki kranti notes in hindi

रूसी क्रांति के प्रमुख कारण-

निरंकुश और स्वेच्छाचारी जार का शासन – रूस में लंबे समय से निरंकुश राजशाही का शासन था जो राजस्व की देवीय सिद्धांत में विश्वास करते थे ।तथा मानते थे कि जार उसका एक ही पति है और किसी के प्रति उत्तरदाई नहीं है क्रांति के समय जार निकोलस द्वितीय था इसके समय प्रेस की स्वतंत्रता नहीं थी नागरिकों को किसी प्रकार की अधिकार प्राप्त नहीं थी तथा बौद्धिक गतिविधियों पर कठोर नियंत्रण था ।निरंकुश शासक उस समय मौजूद था। यूरोप में राजनीतिक परिवर्तन हो रहे थे तथा संवैधानिक राजतंत्र और गणतंत्र की स्थापना हो रही थी ऐसी स्थिति में जार की निरंकुशता जनता के लिए असहनीय हो गए और वह जार शाही के विरुद्ध संगठित हो गए ।  russia ki kranti notes in hindi

अयोग्य व भ्रष्ट नौकरशाह – रूस में  जारो ने जो नौकरशाही की स्थापना की थी वह और अकुशल थी ।शासन के उच्च पदों पर कुलीन वर्ग को नियुक्त किया जाता था जो स्वयं भी निरंकुश और स्वेच्छाचारी थे ।यह नौकरशाह वंशानुगत रूप लिए हुए थे इस प्रकार शासन में योग्यता और भ्रष्टाचारी नौकरशाही का बोला था ।इसमें जनता को और भी क्रोधित किया। russia ki kranti notes in hindi




किसानों की दयनीय दशा – 18 वीं सदी में यूरोप में औद्योगिक क्रांति हुई जिस कारण वह कृषि उत्पादन में वृद्धि नए उद्योग में काम करने के लिए यातायात के साधनों का प्रयोग हुआ किंतु रूस एक कृषि प्रधान देश होने के बावजूद पिछड़ा रहा यहां कृषकों को दशा अत्यंत दयनीय थी 1861 में कृषक दास की मुक्ति की व्यवस्था की गई थी इसके कोई विशेष परिवर्तन नहीं आया अभी भी 68% भूमि जमींदारों के पास 13% भूमि चर्च के अधिकार में थी ।जमीदार किसानों से बेगार लेते थे जिसे कोरवी कहा जाता था ।इसने किसानों की स्थिति को और भी दयनीय बना दिया किसान खेती के उन्नत तरीके अपनाने के असमर्थ थे क्योंकि स्वयं के भरण पोषण और जमींदारों का कर निकालते हुए उनके पास पूंजी का अभाव था। अतः पुरातन तरीके से की जाने वाली खेती में उनकी दशा और भी दयनीय हो गई उन्होंने करो की कमी तथा विशेष अधिकारो की समाप्ति की मांग की । असंतोष कृषक वर्ग की दशा का लाभ उठाकर क्रांतिकारी समाजवादी दल ने इन्हें शासन के विरुद्ध खड़ा कर दिया । russia ki kranti notes in hindi

श्रमिकों की हीन दशा – रूस में औद्योगिकरण की स्थिति बहुत देर से आई ग्रामीण क्षेत्रों में व्याप्त भुखमरी और बेरोजगारी से मुक्ति की तलाश में लोग शहरों की ओर उद्योगों में काम करने पहुंचे श्रमिकों की भीड़ में उनके परिश्रम का मूल्य कम कर दिया गया । इससे न्यूनतम मजदूरी के बदले अधिकतम काम लेने की प्रवृत्ति उद्योगपतियों में बढ़ गई श्रमिकों के घंटे निश्चित नहीं थे मजदूरी भी निश्चित नहीं थी शारिरिक क्षतिपूर्ति का कोई प्रावधान नहीं था । श्रमिकों के  आवास, स्वास्थ्य ,शिक्षा मनोरंजन आदि की कोई व्यवस्था नहीं थी यह मजदूर संघ स्थापित नहीं कर सकते थे ।उनकी दशा अत्यंत दयनीय थी । 1898 में  गठित सोशियल डेमोक्रेटिक पार्टी ने श्रमिकों में असंतोष को समाजवादी क्रांति में तब्दील कर दिया । russia ki kranti notes in hindi

सामाजिक और आर्थिक असमानता –  असमानता रूसी समाज दो आसमान वर्गों में बंटा था-

प्रथम विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग  इसमें कुलीन ,सामन्त,जार के कृपा पात्र तथा बड़े पूंजीपति थे।



दूसरा अधिकार विहीन श्रमिक वर्ग था जिसमें किसान मजदूर मध्यम वर्ग शिक्षक आदि शामिल थे । प्रथम वर्ग निरंकुश और स्वेच्छाचारी था।  तथा उत्पादन के सभी साधन उनके हाथों में थे तथा अधिकार विहीन वर्ग उत्पादन के साधनों का सामाजिकरण करने के पक्ष में था। इसी आर्थिक और सामाजिक विषमता के कारण उत्पन्न वर्ग संघर्ष की क्रांति का आधार बना । russia ki kranti notes in hindi

समाजवादी विचारधारा का विकास –  यूरोप में औद्योगिक क्रांति के परिणाम स्वरूप समाजवादी विचारधारा अस्तित्व में आई । समाजवादियों का उद्देश्य मजदूरों की कार्य एवं आवासीय दशा में सुधार करना था और रूस में  भी समाजवादी विचारधारा का तीव्रता से विकास होने लगा फलस्वरूप 1898 में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी तथा 1902 में सोशियल रिवॉल्यूशनरी पार्टी की स्थापना हुई। सोशलिस्ट रिवॉल्यूशनरी पार्टी किसानों को संगठित कर क्रांति लाना चाहती थी जबकि सोशियल डेमोक्रेटिक पार्टी सर्वहारा वर्ग की क्रांति को आधार मानते थे ।सोशियल डेमोक्रेटिक पार्टी 1903 में दो वर्गों में विभाजित हो गई। बोल्शेविक जो बहुमत में था तथा दूसरा मैनशेविक्स जो अल्पमत में था इन समाजवादी दलों ने किसानों और मजदूरों को संगठित कर उनके असंतोष को दूर करके क्रांति के लिए आधार तैयार किया। russia ki kranti notes in hindi

जार की रूसीकरण की नीति – रूस में रूसी ,यहूदी ,उजबेक ,पोल, तातर आदि विभिन्न जातियां रहती थी। जिनकी अपनी सामाजिक व सांस्कृतिक परंपरा थी जार इनको अपनी संस्कृति छोड़ कर रूसी करन हेतु मजबूर कर रहा था जार अलेक्जेंडर 3 ने नारा भी दिया था एक चर्च और एक रूस इससे गेर रुसी जातियां जार शाही की कट्टर विरोधी बन गई । russia ki kranti notes in hindi

प्रगतिशील चेतना का विकास – उपन्यासों और नाटकों के माध्यम से रूस की राजनीतिक सामाजिक आर्थिक व सांस्कृतिक सरंचना पर तीखी टिप्पणी होने लगी इससे रूस में एक नई चेतना का विकास हुआ इस समय टॉलस्टॉय, गोरकी आदि उच्च कोटि के उपन्यास कहानी व नाट्य लेखक ने बोद्धिक चेतना  को बढ़ाने में महत्वपूर्ण कार्य किया ।इन सब के प्रभाव में एक सशक्त बुद्धिजीवी वर्ग का उदय हुआ । russia ki kranti notes in hindi

रूस जापान युद्ध – 1905 में रूस जापान युद्ध में रूस बुरी तरह हारा ।इस पराजय ने उसकी महानता को मिथ्या साबित किया। एशिया के एक छोटे देश जापान से पराजित हो गया था। रूसी जनता देश की व्यवस्था के लिए जार के शासन व्यवस्था को दोषी ठहराने लगी इस इस पराजय  ने पहली बार रूसी जनता जनता को एक उदारवादी क्रांति के लिए प्रेरित किया ।जिसके प्रमुख मांग एक प्रतिनिधि सभा की स्थापना और शासन को उदार बनाना था ।

1905 की क्रांति – 9 जनवरी 1905 रविवार के दिन सेंट पीटर्स वर्ग की सड़कों पर मजदूरों का शांतिपूर्वक जुलूस जार के राज महल की ओर प्रस्थान कर रहा था तभी शाही सेना ने मजदुरो पर गोलियों की बौछार कर दी जिसमें हजारों मजदूर मारे गए यह दिन इतिहास में खूनी रविवार के नाम से जाना जाता है ।इस घटना से देश भर में जार जारशाही के विरुद्ध असंतोष की लहर फैल गई परिणाम जार निकोलस  को मजबूर होकर उनकी मांगें मानी पड़ी तथा प्रशासकीय सुधारों की घोषणा करनी पड़ी ।इससे  पहली बार संसद की स्थापना हुई जिसे ड्यूमा कहा जाता है। 1905 की क्रांति को एक वास्तविक क्रांति नहीं कहा जा सकता यह सफलता का एक पड़ाव कहा जा सकता है ।

तात्कालिक कारण – प्रथम विश्व युद्ध में रूस की भागीदारी जार की साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षा ने उसको 1914 के प्रथम विश्व युद्ध में धकेल दिया उसने मित्र राष्ट्रों की ओर से भागीदारी निभाई युद्ध में जर्मनी ने रूसी प्रदेशों पर अधिकार कर लिया रूस में किसानों को जबरन सेना में भर्ती किया गया ।उचित प्रशिक्षण अस्त्र शस्त्रों का अभाव तथा लोहे और कोयले की कमी के कारण कारखाने बंद होने लगे तथा परिणाम स्वरूप आर्थिक रूप से जर्जर रूस पतन की ओर पहुंच गया रूसी सेनाओ की निरंतर पराजय से सैनिकों तथा जनता भी इसे राष्ट्रीय अपमान के रूप में देखने लगी। जारशाही और उसका दरबार बिखरने की कगार पर आ गया सभी को अपने कष्टों का कारण शासन की योग्यता मैं नजर आ रहा था इस प्रकार प्रथम विश्व युद्ध में रूस में क्रांति की प्रक्रिया को तेज कर दिया ।

रूसी क्रांति के परिणाम/ प्रभाव / महत्व :-

  1917 की रूसी क्रांति 20 वी सदी  पूर्वार्ध की सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटना थी जिसका प्रभाव ना केवल रूस बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दूरगामी प्रभाव पड़ा। russia ki kranti notes in hindi

इसके प्रमुख परिणाम –

जारशाही की समाप्ति-  रूसी क्रांति ने निरंकुश और प्रतिक्रियावादी जारशाही को समाप्त कर दिया किसानों के नेतृत्व में समाजवादी शासन व्यवस्था की स्थापना की । 

अनेक राजवंश का अंत-  रूस में चले आ रहे पिछले 300 वर्षों से स्थापित रोमानोव राजवंश का अंत कर दिया इस क्रांति की सफलता ने यूरोप में जो राजनीतिक चेतना उत्पन्न कि उसे राजतंत्र विरोधी भावनाएं और अधिक प्रबल हुई ।जिसमें विश्व के अनेक देशों में कई राज्यों का अंत हुआ जैसे ऑस्ट्रिया हंगरी में हेप्सवर्ग राज वंश का अंत तुर्की में युवा तुर्क आंदोलन जिसने  खलीफा के सत्ता की समाप्ति।




प्रथम विश्व युद्ध में रूस का हटना – प्रथम विश्व युद्ध रूसी क्रांति का तत्कालीन कारण सिद्ध हुआ था जारशाही का अंत कर जो बोल्शेविक सरकार सत्ता में आई उसने 1918 में जर्मनी के साथ बेस्टलितोवस्की की संधि की और रूस को युद्ध से अलग किया। russia ki kranti notes in hindi

समाजवादी विचारधारा का प्रचार – 1917 की बोल्शेविक क्रांति की सफलता ने मार्क्सवादी विचारधारा को साकार रूप दिया जिसमें साम्राज्यवाद का व्यवहारिक रूप सामने आया है यह विचारधारा किसानों मजदूरों तथा दलितों में बहुत लोकप्रिय हुई। रूस में सफलता के बाद यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित होने लगी इसी के लिए 1919 में प्रथम कम्युनिस्ट इंटरनेशनल की स्थापना की गई। चीन में माओ तसे तुंग तथा वियतनाम के होम ची मिन्ह के संदर्भ में इसे समझा जा सकता है । russia ki kranti notes in hindi

उपनिवेशवाद से मुक्ति – ऑप्नेवेशिक साम्रज्यवाद का मुख्य उद्देश्य अपने अधीन राष्ट्रों का शोषण करना था तथा इस ने उपनिवेश के निवासियों को प्रजातांत्रिक व नागरिक अधिकारों से वंचित किया हुआ था। बोल्शेविक क्रांति ने समाजवादी शक्तियों के विरुद्ध ना केवल स्वतंत्रता आंदोलन को प्रेरित किया बल्कि उनका समर्थन भी किया भारत सहित एशिया और अफ्रीका के सभी देशों में सोवियत संघ को अपना मित्र और समर्थक समझा जाने लगा । 

विश्व का दो वैचारिक गुटों में बंटना – बोल्शेविक क्रांति से पूर्व विश्व में राष्ट्रवाद तथा उपनिवेशवाद का बोलबाला था किंतु क्रांति के बाद रूस में समाजवादी सरकार की स्थापना से पूंजीवाद विचारधारा को ठेस लगी और विश्व दो गुटों में विभाजित हो गया । russia ki kranti notes in hindi

आर्थिक समानता – का जन्म क्रांति के बाद उत्पादन के साधनों कारखानों भूमि आदि का समाजीकरण हो गया जमींदारों कुलीनो सामंतों पूजी पतियों का विशेषाधिकार समाप्त हो गया।

रूस का आर्थिक व औद्योगिक विकास – क्रांति के बाद निजी संपत्ति का राष्ट्रीयकरण बिना मुवावजे के किया गया और कारखानों पर श्रमिकों के स्वामित्व को लागू किया गया इससे ना केवल कामगारों और मजदूरों का मनोबल बढ़ा बल्कि उत्पादन की प्रक्रिया पर सार्वजनिक नियंत्रण स्थापित किया जा सका ।इससे रूस का स्वतंत्र औद्योगिक आर्थिक विकास हुआ । russia ki kranti notes in hindi

नियोजित अर्थव्यवस्था का विकास – रूस ने नियोजित अर्थव्यवस्था को अपनाया जिससे उनके आर्थिक विकास में तीव्र वृद्धि हुई और इसी के बल पर वह 1929 की आर्थिक मंदी के दुष्प्रभाव से आगे चलकर भारत सहित अनेक देशों ने अपने आर्थिक विकास के लिए नियोजित अर्थव्यवस्था को अपनाया।

किसान और मजदूरों के जीवन स्तर में सुधार –  क्रांति के बाद श्रमिकों की बिचौलियों के चंगुल से मुक्त कर के श्रम के अनुपात में वेतन की सुविधा उपलब्ध कराई गई प्रत्येक व्यक्ति को काम देना राज्य का कर्तव्य बन गया  शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार की सुनिश्चितता ने मेहनतकश वर्ग को नई स्फूर्ति प्रदान की।

वर्ग भेद की समाप्ति – क्रांति के बाद विशेषाधिकार समाप्त किए गए कुल,वंश,लिंग, नस्ल ,धर्म और जाति भेद किए बिना रूस के  सभी नागरिकों को समान अधिकार मिले इससे समानता का लाभ सामाजिक आर्थिक राजनीतिक शैक्षणिक आदि क्षेत्रों में समान अवसर के रूप में संपूर्ण समाज को मिलने लगा।

धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा – क्रांति के बाद रूस में सभी धर्मों को समानता का दर्जा दिया गया राज्य का धर्म में कोई हस्तक्षेप नहीं रहा नागरिकों को पूरी स्वतंत्रता दी गई किसी भी धर्म के पालन की।

महिलाओं की स्थिति में परिवर्तन – रूसी महिलाओं की स्थिति में परिवर्तन आया अधिक संतान पैदा करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया जाने लगा। क्योंकि इस योगदान में रूसी श्रमिकों व किसानों की आबादी तेजी से बढ़ रही थी। खेत खलियान में ही नहीं कारखानों व प्रयोगशालाओं में भी रूसी महिला पुरुषों के समक्ष कार्य करने लगी। मताधिकार शिक्षा तथा रोजगार में  उन्हें पुरुषों के समान अधिकार दिए गए।

विश्व पर प्रभाव –

  • विश्व में साम्य वादी विचारों का प्रसार हुआ अनेक देशों में साम्यवादी सरकार स्थापित हुई ।
  • -श्रमिकों के प्रति नया दृष्टिकोण श्रम की महता तथा उसके पारिश्रमिक के न्याय पूर्ण वितरण का प्रयास । 
  • -अनेक देशों में श्रमिक संगठनों की स्थापना व आंदोलनों का विकास जैसे आईएलओ की स्थापना । 
  • -अर्थव्यवस्था में आर्थिक नियोजन प्रणाली की शुरुआत ।
  • – विश्व का दो गुटों में विभाजन जो शीत युद्ध का कारण बना।

 बोल्शेविक मैनशेविक में अंतर –

सोशियल डेमोक्रेटिक पार्टी 1898 तथा सोशल रिवॉल्यूशनरी पार्टी 1902 में स्थापना हुई। सोशल रिवॉल्यूशनरी पार्टी किसानों को संगठित कर क्रांति लाना चाहती थी, जबकि सोशियल डेमोक्रेटिक पार्टी सर्वहारा वर्ग को संगठित कर क्रांति कर सुधार मानते थे। कृषको को नहीं । सोशियल डेमोक्रेटिक पार्टी 1903 में दो वर्गों में विभाजित हो गई

– बोल्शेविक जो बहुमत में था और क्रांति का रास्ता अपनाकर मजदूरों का शासन स्थापित करना चाहता था बोल्शेविक का प्रमुख नेता लेनिन था । russia ki kranti notes in hindi

-मेनशेविक जो अल्पमत में था यह मार्क्स के सिद्धांतों में तो विश्वास करते थे लेकिन उनके साधनों में नहीं ।यह परिवर्तन चाहते थे और देश के क्रमिक विकास में विश्वास रखते थे । शिक्षा से धर्म का नियंत्रण समाप्त हुआ तथा उसमें वैज्ञानिक मूल्य समाहित हुए समाजोपयोगी शिक्षा का विस्तार प्राथमिक माध्यमिक उच्च स्तर पर तीव्र गति से हुआ 8 वीं  तक शिक्षा निशुल्क व अनिवार्य कर दी गई । russia ki kranti notes in hindi


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