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Constitution Day : संविधान दिवस 26 नवंबर

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-संविधान दिवस 26 नवंबर

– विश्व का विशालतम और अनोखा संविधान किसी भी देश में व्यवस्था चलाने के लिए विधान की आवश्यकता होती है हमारे देश के आजाद होने के तुरंत बाद हमारे नागरिकों के लिए देश की स्थिति के अनुसार व्यवस्था के लिए विधान की जरूरत थी इससे पहले अंग्रेजों ने अपने स्वार्थ के अनुरूप व्यवस्था बना रखी थी आजादी से पहले महात्मा गांधी ने 1922 में ब्रिटिश सरकार से कहा कि संविधान सभा और संविधान निर्माण होगा तभी देश को स्वाधीनता मिलेगी कांग्रेसमें आजादी के पूर्व 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज की मांग के प्रस्ताव को पारित किया था स्वराज दल ने 1934 में अंग्रेजों से संविधान सभा की मांग की थी इसके बाद दिसंबर 1936 का कांग्रेस अधिवेशन में संविधान सभा का समर्थन किया लखनऊ में दिसंबर 1936 में कांग्रेस अधिवेशन के दौरान संविधान सभा के अर्थ और महत्व की व्याख्या की गई इसके बाद कांग्रेस ने 1937 में और 1938 में संविधान सभा की मांग को दोहराया ब्रिटिश शासन ने इस मांग को तवज्जो नहीं दी 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद ब्रिटेन में भारत को आजाद करने की शुरुआत हो गई थी ब्रिटिश प्रधानमंत्री लॉर्ड एटली ने अपने मंत्रिमंडल के तीन सदस्य का दल भारत को सत्ता सौंपने के उद्देश्य से भारत भेजा इसे कैबिनेट मिशन का नाम दिया गया था। 26 November constitution day know important facts about it

कैबिनेट मिशन ने संविधान सभा और अंतः कालीन सरकार बनाने की घोषणा की कैबिनेट मिशन योजना के अनुसार संविधान सभा के गठन के उद्देश्य से 1946 से अप्रत्यक्ष चुनाव कराए गए संविधान सभा का पहला अधिवेशन 9 दिसंबर 1940 को हुआ इसकी अध्यक्षता डॉ सच्चिदानंद सिन्हा ने की थी इसी अधिवेशन में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा की स्थाई समिति का अध्यक्ष चुना गया और वही संविधान के बनने तक अध्यक्ष रहे कांग्रेस ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को मुंबई प्रांत से चुनकर विधानसभा में भेजा डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने ब्रिटिश काल के मुंबई प्रांत के प्रधानमंत्री बीजी खेर को पत्र लिखकर कहा था कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का संविधान सभा में चुनाव सुनिश्चित किया जाए उन्होंने पत्र में लिखा कि डॉक्टर अंबेडकर के काम का स्तर इतने उच्च कोटि का रहा है कि हम उनकी सेवाओं से स्वयं को वंचित नहीं कर सकते इसके बाद 29 अगस्त 1947 को संविधान सभा ने प्रारूप समिति का गठन किया तब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को संविधान प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनाया गया इस समिति में 7 सदस्य गोपाल स्वामी आयंगर सर अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर के एम मुंशी सर मोहम्मद शादुल्ला माधव मेनन और डीपी खेतान थे इस प्रारूप समिति ने संविधान की मूल अवधारणा को रेखांकित किया और इसलिए डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को संविधान का जनक माना जाता है वे तत्कालीन व्यवस्था के पारखी थे उन्होंने ब्रिटेन जाकर बार एट लॉ की उपाधि हासिल की थी। 26 November constitution day know important facts about it

संविधान सभा में देश भर के हर वर्ग के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया था इस संविधान सभा में महात्मा गांधी और मोहम्मद अली जिन्ना को छोड़कर सभी प्रमुख लोगों को रखा गया था संविधान की रचना करने में डॉक्टर अंबेडकर की मेहनत का अनुमान इस बात से ही लगाया जा सकता है कि टीटी कृष्णमाचारी ने संविधान सभा में अपने वक्तव्य में संविधान रचना का जिक्र करते हुए डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की प्रशंसा की थी उन्होंने कहा था कि संविधान सभा में 7 मनोनीत सदस्य थे उनमें से एक ने संविधान सभा से त्यागपत्र दे दिया जिसकी पूर्ति कर दी गई थी एक सदस्य का स्थान नहीं भरा गया एक सदस्य के अमेरिका चले जाने के बाद स्थान खाली रहा एक सदस्य राजकीय कार्य में व्यस्त रहे और उनका स्थान भी खाली ही रहा एक सदस्य दिल्ली से बाहर रहे और शायद स्वास्थ्य कारणों से उपस्थित नहीं हो सके हुआ यह कि संविधान बनाने का सारा भार डॉ आंबेडकर के कंधों पर आ पड़ा इसमें मुझे संदेह नहीं कि जिस ढंग से उन्होंने संविधान तैयार किया हम उसके लिए कृतज्ञ हैं यह निसंदेह प्रशंसनीय कार्य है पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा कि अक्सर डॉक्टर अंबेडकर को संविधान निर्माता कहा जा रहा है। 26 November constitution day know important facts about it

वह अपनी तरह से कह सकते हैं कि उन्होंने बड़ी सावधानी और कष्ट उठाकर संविधान बनाया है उनका बहुत महत्वपूर्ण और रचनात्मक योगदान है डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने अपनी प्रतिभा के बल पर दुनिया के सफलतम देशों के संविधान का अध्ययन किया इसमें अलग-अलग देशों की संविधान की खूबियों को भारत के परिप्रेक्ष्य में शामिल किया गया है भारतीय संविधान में संघवाद कनाडा से लिया गया है तो ब्रिटिश संविधान से संसदीय प्रणाली को लिया गया है वहीं अमेरिकी संविधान से उद्देशिका का स्त्रोत लिया गया है संयुक्त राष्ट्र से न्यायिक पुनरावलोकन का प्रावधान किया गया है दूसरी और भारत में राष्ट्रपति के चुनाव की प्रणाली आयरलैंड से ली गई है संविधान में मौलिक अधिकार के निलंबन का सिद्धांत जर्मनी से लिया गया है डॉ भीमराव अंबेडकर ने संविधान की रचना से पहले शोध और अध्ययन किया था तब कहीं जाकर देश के सभी नागरिकों की मंशा के अनुरूप संविधान की रचना हो सके संविधान सभा को अपना काम पूरा करने में और पूर्ण संविधान बनाने में 2 साल 11 महीने और 18 दिन का समय लगा । 26 November constitution day know important facts about it

-ऐसी है संविधान की प्रस्तावना

संविधान की प्रस्तावना को उसकी आत्मा माना गया है हम भारत के लोग भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने के लिए और इसके समस्त नागरिकों को सामाजिक आर्थिक राजनीतिक न्याय विचार अभिव्यक्ति धर्म विश्वास और उपासना की स्वतंत्रता प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए तथा व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता तथा अखंडता सुनिश्चित करने वाला बंधुत्व बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी संविधान सभा में आज दिनांक 26 नवंबर 1949 को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत अधिनियमित और आत्मर्पित करते हैं इसी दिन गुरुदेव रविंद्र नाथ टैगोर द्वारा रचा गया राष्ट्रगान जन गण मन गाया गया भारतीय संविधान पारित होने के बाद सभी 284 संसद सदस्य ने उस पर हस्ताक्षर किए इनमें 15 महिला सदस्य शामिल थी। 26 November constitution day know important facts about it

संविधान की मूल प्रति को आज भी संसद के पुस्तकालय में हीलियम के अंदर डाल कर रखा गया है संविधान की मूल प्रति हाथ से लिखी गई थी भारत का संविधान दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान माना जाता है इसमें 448 अनुच्छेद 12 अनुसूचियां और पांच परिशिष्ट है यह संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है डॉ राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति बने और उन्होंने ही संविधान के लागू होने के पूर्व हस्ताक्षर किए इसके साथ ही अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 26 जनवरी 1950 को और विक्रम कैलेंडर के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी संवत 2006 में देश में अपना संविधान लागू हो गया 26 जनवरी 1950 को ही सारनाथ में सम्राट अशोक द्वारा बनाए गए सिंह स्तंभ को भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में अपनाया गया इसी दिन सिंह स्तंभ के पहिए बैल और घोड़े की मूर्ति वाले हिस्से को राष्ट्रीय चिन्ह बनाया गया डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के 125 वे वर्ष के मौके पर 29 नवंबर 2015 को संविधान दिवस मनाए जाने की घोषणा की गई इससे पहले इस दिन को कानून दिवस के रूप में मनाया जाता था यह संविधान  न सिर्फ नागरिकों को उनके अधिकार प्रदान करता है साथ ही उनको उनकी कर्तव्य की भी याद दिलाता है यह विश्व का विशालतम विधान है देश के प्रथम नागरिक से आम नागरिक तक को अधिकार प्रदान करता है। 26 November constitution day know important facts about it


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